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Bilaspur News: मिशन दृष्टि की पहली जांच में 11 बच्चों की नजर कमजोर

Tue, 18 Aug 2026 11:54 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2026 11:54 PM IST
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Weak eyesight found in 11 children during the first screening of Mission Drishti.
डियारा में बच्चों के आंखों की जांच करतीं चिकित्सक। स्रोत: डीपीआरओ
बिलासपुर में पायलट चरण शुरू, एक सितंबर से पूरे जिले में चलेगा मिशन दृष्टि, आठ साल तक के बच्चों की होगी स्क्रीनिंग
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चिह्नित बच्चों का किया जाएगा फॉलोअप, जरूरत के अनुसार मिलेगा उपचार

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बच्चों की आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्याओं की समय रहते पहचान और उपचार के लिए जिला प्रशासन ने मिशन दृष्टि बिलासपुर का पायलट चरण शुरू किया है। मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय डियारा और आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान उपायुक्त राहुल कुमार भी मौजूद रहे। पायलट चरण में कुल 52 बच्चों की आंखों की जांच की गई। इनमें 11 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष मिले, जो जांच किए गए बच्चों का करीब 20 प्रतिशत है। दो बच्चों में एस्टिग्मेटिज्म की भी पहचान हुई। चिह्नित बच्चों का आगे फॉलोअप किया जाएगा और जरूरत के अनुसार उन्हें चिकित्सकीय परामर्श व उपचार उपलब्ध करवाया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि दत्त शर्मा और आई स्पेशलिस्ट ईशानी ने बच्चों की जांच की। इस दौरान आधुनिक ऑटो रिफ्रैक्टोमीटर से प्रारंभिक स्क्रीनिंग की गई। इससे बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या और रिफ्रैक्टिव एरर की पहचान करने में मदद मिली। अधिकारियों के अनुसार कई बच्चे आंखों में परेशानी होने के बावजूद इसकी शिकायत नहीं कर पाते। कमजोर नजर का असर पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ सकता है। बोर्ड पर साफ दिखाई न देना, किसी वस्तु पर फोकस करने में परेशानी, पढ़ाई में ध्यान न लगना और सिरदर्द जैसी समस्याएं कमजोर नजर के संकेत हो सकते हैं। उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि पायलट चरण के अनुभव के आधार पर पहली सितंबर से पूरे जिले में मिशन दृष्टि का व्यापक अभियान शुरू किया जाएगा। पहले चरण में आठ वर्ष तक की आयु के बच्चों की स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान रहेगा। आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा।

स्क्रीनिंग के बाद भी होगी निगरानी
अभियान के तहत स्क्रीनिंग में चिह्नित बच्चों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके बाद उनके मामलों की निगरानी और नियमित फॉलो-अप किया जाएगा। जिन बच्चों को चश्मे, विशेषज्ञ परामर्श या अन्य उपचार की जरूरत होगी, उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य केवल आंखों की समस्या पहचानना नहीं, बल्कि उसका समाधान सुनिश्चित करना है। समय पर जांच और उपचार से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि कमजोर नजर किसी बच्चे की पढ़ाई और भविष्य में बाधा न बने।
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