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Chamba News: बुरांस के फूलों से सपने बुन रहीं भलेई की सरिता
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Sun, 15 Mar 2026 10:23 PM IST
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पहाड़ों में उगे बुंरास के फुल: जागरूक पाठक
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जंगलों से फूल जुटाकर चटनी और जूस बनाकर खोल रहीं आत्मनिर्भरता की राह
अभी गांव में ही बिक रही चटनी, जिलास्तर पर पहुंचाने के लिए कर रही हैं प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पहाड़ की वादियों में खिले बुरांस के फूल सर्दियों की खूबसूरती नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन रहे हैं।
भलेई की सरिता ने जंगलों से बुरांस के फूल जुटाकर उन्हें स्वादिष्ट और औषधीय गुणों से भरपूर चटनी और जूस में बदल दिया है। उनके इस प्रयास ने सिर्फ पहाड़ी व्यंजन को नया रूप नहीं दिया, बल्कि गांव की महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोल दी है।उनका यह प्रयास धीरे-धीरे बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहा है। सरिता दूरदराज के जंगलों से बुरांस के फूल एकत्रित करती हैं। इन्हें घर लाकर सुखाया जाता है। फिर स्वादिष्ट और औषधीय गुणों से भरपूर चटनी तैयार की जाती है। बुरांस को सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है। सरिता ने बताया कि यह काम छोटे स्तर पर शुरू किया है। उनकी बनाई चटनी गांव में ही बिक रही है। भविष्य में इसे जिला स्तर तक पहुंचाने की योजना है।
सरिता ने कहा कि पहाड़ों की महिलाएं प्रतिभा और मेहनत में किसी से कम नहीं हैं। प्रोत्साहन मिले तो छोटे-छोटे घरेलू प्रयास भी बड़े रोजगार में बदल सकती हैं। वह चटनी के साथ वह बुरांस का जूस भी तैयार करती हैं। यदि लोगों की मांग बढ़ती है तो इसे भी बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की योजना है। उनके इस कार्य में आसपास की महिलाएं भी सहयोग कर रही हैं जिससे यह पहल भविष्य में सामूहिक रोजगार का रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि पहले पहाड़ों में बुरांस के फूल बहुतायत में मिलते थे लेकिन अब कई स्थानों पर इनकी संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में बुरांस जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ इनके उत्पादों को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
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अभी गांव में ही बिक रही चटनी, जिलास्तर पर पहुंचाने के लिए कर रही हैं प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। पहाड़ की वादियों में खिले बुरांस के फूल सर्दियों की खूबसूरती नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन रहे हैं।
भलेई की सरिता ने जंगलों से बुरांस के फूल जुटाकर उन्हें स्वादिष्ट और औषधीय गुणों से भरपूर चटनी और जूस में बदल दिया है। उनके इस प्रयास ने सिर्फ पहाड़ी व्यंजन को नया रूप नहीं दिया, बल्कि गांव की महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोल दी है।उनका यह प्रयास धीरे-धीरे बड़ी सफलता की ओर बढ़ रहा है। सरिता दूरदराज के जंगलों से बुरांस के फूल एकत्रित करती हैं। इन्हें घर लाकर सुखाया जाता है। फिर स्वादिष्ट और औषधीय गुणों से भरपूर चटनी तैयार की जाती है। बुरांस को सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है। सरिता ने बताया कि यह काम छोटे स्तर पर शुरू किया है। उनकी बनाई चटनी गांव में ही बिक रही है। भविष्य में इसे जिला स्तर तक पहुंचाने की योजना है।
सरिता ने कहा कि पहाड़ों की महिलाएं प्रतिभा और मेहनत में किसी से कम नहीं हैं। प्रोत्साहन मिले तो छोटे-छोटे घरेलू प्रयास भी बड़े रोजगार में बदल सकती हैं। वह चटनी के साथ वह बुरांस का जूस भी तैयार करती हैं। यदि लोगों की मांग बढ़ती है तो इसे भी बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की योजना है। उनके इस कार्य में आसपास की महिलाएं भी सहयोग कर रही हैं जिससे यह पहल भविष्य में सामूहिक रोजगार का रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि पहले पहाड़ों में बुरांस के फूल बहुतायत में मिलते थे लेकिन अब कई स्थानों पर इनकी संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में बुरांस जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ इनके उत्पादों को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
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