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Chamba News: आखिरी शब्द... पीयूष की तबीयत काफी खराब हो गई है
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 27 Jan 2026 10:48 PM IST
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विकसित राणा और पीयूष का कुत्ता जोनू स्रोत : सोशल मीडिया
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भरमौर (चंबा)। पीयूष की तबीयत काफी खराब हो गई है, मैं उसे जंगल पर छोड़कर मदद के लिए आ रहा हूं, लेकिन मुझे बर्फ में रास्ते का कुछ पता नहीं लग रहा है। यह बात विकसित राणा ने अपने मलकोता गांव के युवक के साथ फोन पर 23 जनवरी शाम 6 बजे आखिरी बार कही थी।
उसने यह भी कहा कि वे जंगल में बर्फ के बीच फंस चुके हैं, उन्हें मदद की जरूरत है। उसके बाद उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। गांववासी उनकी तलाश करने के लिए जंगल की तरफ निकले, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण उन्हें बीच से वापस लौटना पड़ा। जहां पर उन्होंने रात बिताने के लिए 22 जनवरी को टेंट लगाया था, वह तेज अंधड़ की चपेट में आने से तहस नहस हो गया।
इसके चलते वह अपना टेंट और सामान वहीं छोड़कर जंगल की तरफ निकले, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका यह कदम उन्हें मौत के करीब ले जाएगा। यदि दोनों टेंट में रहकर बचाव दल के आने का इंतजार करते तो शायद उनके जिंदा बचने की संभावना हो सकती थी।
दोनों युवाओं ने मौके की परिस्थिति को भांपते हुए जंगल के रास्ते वापस घर के लिए लौटना सुरक्षित समझा, लेकिन अंधड़ में दोनों ऐसे फंसे कि जिंदा बाहर नहीं निकल पाए। पीयूष का शव एक पेड़ के नीचे पड़ा था तो विकसित राणा उससे थोड़ी दूर नाले पड़ा था, जो कि, बर्फ में गहरी खाई के खतरे को भांप नहीं पाया। दोनों युवाओं के शव इस बात की गवाही दे रहे थे कि जिंदा रहने के लिए उन्होंने कितनी जद्दोजहद की होगी।
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उसने यह भी कहा कि वे जंगल में बर्फ के बीच फंस चुके हैं, उन्हें मदद की जरूरत है। उसके बाद उसका फोन स्विच ऑफ हो गया। गांववासी उनकी तलाश करने के लिए जंगल की तरफ निकले, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण उन्हें बीच से वापस लौटना पड़ा। जहां पर उन्होंने रात बिताने के लिए 22 जनवरी को टेंट लगाया था, वह तेज अंधड़ की चपेट में आने से तहस नहस हो गया।
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इसके चलते वह अपना टेंट और सामान वहीं छोड़कर जंगल की तरफ निकले, लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनका यह कदम उन्हें मौत के करीब ले जाएगा। यदि दोनों टेंट में रहकर बचाव दल के आने का इंतजार करते तो शायद उनके जिंदा बचने की संभावना हो सकती थी।
दोनों युवाओं ने मौके की परिस्थिति को भांपते हुए जंगल के रास्ते वापस घर के लिए लौटना सुरक्षित समझा, लेकिन अंधड़ में दोनों ऐसे फंसे कि जिंदा बाहर नहीं निकल पाए। पीयूष का शव एक पेड़ के नीचे पड़ा था तो विकसित राणा उससे थोड़ी दूर नाले पड़ा था, जो कि, बर्फ में गहरी खाई के खतरे को भांप नहीं पाया। दोनों युवाओं के शव इस बात की गवाही दे रहे थे कि जिंदा रहने के लिए उन्होंने कितनी जद्दोजहद की होगी।