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Chamba News: मेडिकल कॉलेज में गर्भवती महिलाओं के नहीं हो रहे टेस्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 06 Mar 2026 10:31 PM IST
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हेपेटाइटिस बी, सी और बायोप्सी के टेस्ट न होने से बढ़ी मुसीबतें
निशुल्क होने वाले टेस्ट की एवज में खर्च कीले पड़ रहे हैं पैसे
दिन-प्रतिदिन लचर होती जा रही मेडिकल कॉलेज चंबा में व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में गर्भवती महिलाओं के हेपेटाइटिस बी, सी समेत बायोप्सी के टेस्ट तक नहीं हो रहे हैं। हेपेटाइटिस बी, सी का टेस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं को मजबूरन निजी लैबों में जाकर 200 से 500 रुपये अदा करने पड़ रहे हैं।
इससे लोगों की जेबों पर खूब कैंची चल रही है। हैरानी की बात है कि इन टेस्टों को आरंभ करने को लेकर प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पग आगे नहीं बढ़ाए जा सके हैं। इसका खामियाजा पांच विधानसभा क्षेत्रों चंबा, चुराह, भटियात, भरमौर-पांगी और डलहौजी के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उपचार करवाने के लिए पहुंचने वाले मरीज मेडिकल कॉलेज चंबा की लचर व्यवस्था को कोसते नजर आ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज चंबा में किसी प्रकार का मेडिकल बनवाने, ऑपरेशन, या गर्भवती महिलाओं के होने वाला सामान्य हेपेटाइटिस बी का टेस्ट तक नहीं हो पा रहा है। सरकारी प्रयोगशाला में यह टेस्ट निशुल्क होता है। गर्भवती महिलाओं का जब अस्पताल में एएनसी कार्ड बनाया जाता है तो उस दौरान उनके लिए हेपेटाइटिस टेस्ट करवाना अनिवार्य होता है। इससे गर्भवती महिलाओं के लिवर में संक्रमण का पता चलता है। जिले की सैकड़ों गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य जांच के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज आती हैं। प्रसव के लिए भी मेडिकल कॉलेज चंबा आती हैं। जिले के अन्य अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञाें के पद खाली हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में भी हेपेटाइटिस बी का टेस्ट न हो पाना चिंता का सबब है।
क्या है बायोप्सी टेस्ट बायोप्सी एक नैदानिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर के किसी अंग से टीशू या कोशिकाओं का छोटा नमूना लेकर सूक्ष्मदर्शी से जांच की जाती है। यह मुख्य रूप से कैंसर या ट्यूमर की पुष्टि करने, गांठ की प्रकृति (कैंसर युक्त या सौम्य) जानने और सूजन संबंधी विकारों (जैसे किडनी/लीवर की समस्या) के निदान के लिए किया जाता है।
उधर, मेडिकल कॉलेज चंबा के एमएस डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। जल्द हेपेटाइटिस-बी,सी और बायोप्सी टेस्ट शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे।
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मेडिकल कालेज चंबा के नाम बड़े दर्शन छोटे वाली बात देखने को मिल रही हैं। मामूली से मामूली टेस्ट की सहूलियत यहां पर नहीं मिल रही है। - अनवर, तीमारदार
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राजनेताओं और स्वास्थ्य विभाग को जिला के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान की सुध लेने को समय रहते कदम उठाने की आवश्यकता है। - अजय कुमार, तीमारदार
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मेडिकल कॉलेज में निशुल्क होने वाले हेपेटाइटिस-बी का टेस्ट तक ही सुविधा गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पा रही है। जो चिंता का सबब है। - मीनाक्षी, तीमारदार
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मेडिकल बनवाने, ऑपरेशन से पूर्व, या गर्भवती महिलाओं के लिए अनिवार्य टेस्ट की सहूलियत भी मेडिकल कॉलेज में न मिलना पोल खोल रहा है। - मेहनाज, तीमारदार
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निशुल्क होने वाले टेस्ट की एवज में खर्च कीले पड़ रहे हैं पैसे
दिन-प्रतिदिन लचर होती जा रही मेडिकल कॉलेज चंबा में व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। मेडिकल कॉलेज चंबा में गर्भवती महिलाओं के हेपेटाइटिस बी, सी समेत बायोप्सी के टेस्ट तक नहीं हो रहे हैं। हेपेटाइटिस बी, सी का टेस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं को मजबूरन निजी लैबों में जाकर 200 से 500 रुपये अदा करने पड़ रहे हैं।
इससे लोगों की जेबों पर खूब कैंची चल रही है। हैरानी की बात है कि इन टेस्टों को आरंभ करने को लेकर प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पग आगे नहीं बढ़ाए जा सके हैं। इसका खामियाजा पांच विधानसभा क्षेत्रों चंबा, चुराह, भटियात, भरमौर-पांगी और डलहौजी के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उपचार करवाने के लिए पहुंचने वाले मरीज मेडिकल कॉलेज चंबा की लचर व्यवस्था को कोसते नजर आ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज चंबा में किसी प्रकार का मेडिकल बनवाने, ऑपरेशन, या गर्भवती महिलाओं के होने वाला सामान्य हेपेटाइटिस बी का टेस्ट तक नहीं हो पा रहा है। सरकारी प्रयोगशाला में यह टेस्ट निशुल्क होता है। गर्भवती महिलाओं का जब अस्पताल में एएनसी कार्ड बनाया जाता है तो उस दौरान उनके लिए हेपेटाइटिस टेस्ट करवाना अनिवार्य होता है। इससे गर्भवती महिलाओं के लिवर में संक्रमण का पता चलता है। जिले की सैकड़ों गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य जांच के लिए चंबा मेडिकल कॉलेज आती हैं। प्रसव के लिए भी मेडिकल कॉलेज चंबा आती हैं। जिले के अन्य अस्पतालों में महिला रोग विशेषज्ञाें के पद खाली हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में भी हेपेटाइटिस बी का टेस्ट न हो पाना चिंता का सबब है।
क्या है बायोप्सी टेस्ट बायोप्सी एक नैदानिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर के किसी अंग से टीशू या कोशिकाओं का छोटा नमूना लेकर सूक्ष्मदर्शी से जांच की जाती है। यह मुख्य रूप से कैंसर या ट्यूमर की पुष्टि करने, गांठ की प्रकृति (कैंसर युक्त या सौम्य) जानने और सूजन संबंधी विकारों (जैसे किडनी/लीवर की समस्या) के निदान के लिए किया जाता है।
उधर, मेडिकल कॉलेज चंबा के एमएस डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। जल्द हेपेटाइटिस-बी,सी और बायोप्सी टेस्ट शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे।
मेडिकल कालेज चंबा के नाम बड़े दर्शन छोटे वाली बात देखने को मिल रही हैं। मामूली से मामूली टेस्ट की सहूलियत यहां पर नहीं मिल रही है। - अनवर, तीमारदार
राजनेताओं और स्वास्थ्य विभाग को जिला के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान की सुध लेने को समय रहते कदम उठाने की आवश्यकता है। - अजय कुमार, तीमारदार
मेडिकल कॉलेज में निशुल्क होने वाले हेपेटाइटिस-बी का टेस्ट तक ही सुविधा गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पा रही है। जो चिंता का सबब है। - मीनाक्षी, तीमारदार
मेडिकल बनवाने, ऑपरेशन से पूर्व, या गर्भवती महिलाओं के लिए अनिवार्य टेस्ट की सहूलियत भी मेडिकल कॉलेज में न मिलना पोल खोल रहा है। - मेहनाज, तीमारदार