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Chamba News: स्वयं सहायता समूह बनाया, सब्जियां बेचीं और अब चला रहीं आटा चक्की
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Tue, 27 Jan 2026 10:35 PM IST
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चंबा। कुछ कर गुजरने की चाह हो तो बड़ी से बड़ी विपदा से भी पार पाया जा सकता है। ऐसा ही कुछ ग्राम पंचायत बरौर की लंजी निवासी बबली देवी ने कर दिखाया है। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ते देख बबली देवी ने स्वयं सहायता समूह बनाया और महिलाओं को जोड़ कर खेतों सब्जियां उगा बेचती हैं। साथ ही आटा चक्की भी चलाती हैं।
57 वर्षीय बबली के परिवार में पति और तीन बेटे हैं। पांच साल पहले उनका बड़ा बेटा परमेश (वर्तमान में 37) एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया और उनकी गर्दन से नीचे का शरीर बेजान हो गया। खेतीबाड़ी कर परिवार चलाने वाले उनके पति चेत राम के सिर पर मानों दुखों का पहाड़ गिर गया। उनके दोनों छोटे बेटे हेमराज और राकेश बेरोजगार थे। इस कारण बबली ने स्वरोजगार आरंभ करने की ठानी।
उन्होंने गांव की कुछ महिलाओं को मिला कर आदर्श स्वयं सहायता समूह का गठन किया। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए घर-द्वार तक गई और उन्हें समझाया कि परिवार का भरण-पोषण करने में महिलाएं भी आगे आ सकती हैं।
उन्होंने खेत में उगाई जाने वाली सब्जियों को बाजार में बेचना आरंभ किया। स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़ने के बाद उन्हें सही मार्गदर्शन मिलना आरंभ हुआ। अब उनके क्लस्टर शिव भूमि स्वयं सहायता समूह से 300 महिलाएं जुड़ चुकी हैं।
अब उन्हाेंने चंबा-साहो मार्ग पर उन्होंने समूह के अधीन ही दुकान किराये पर ली है। इसमें आटा चक्की चलती है। इसके अलावा वह दुकान में सब्जियां, दूध, शहद, मशरूम, पेस्ट, पत्तल और गिलास समेत अन्य सामान की भी बिक्री करती हैं।
बबली देवी ने बताया कि अब तक उनके बेटे परमिश की स्थिति नहीं सुधर पाई है। वहीं, हेमराज (34) डेयरी की दुकान करता है और राकेश कुमार (32) एकल विद्यालय में आउटसोर्स पर शिक्षक हैं।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन जिला परियोजना अधिकारी ओपी ठाकुर के सही मार्गदर्शन के बल उनका सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहा है। दो से तीन बार उपायुक्त चंबा भी उनके पॉलीहाउस समेत खेतों का विजिट कर उनका मार्ग दर्शन कर चुके हैं।
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57 वर्षीय बबली के परिवार में पति और तीन बेटे हैं। पांच साल पहले उनका बड़ा बेटा परमेश (वर्तमान में 37) एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया और उनकी गर्दन से नीचे का शरीर बेजान हो गया। खेतीबाड़ी कर परिवार चलाने वाले उनके पति चेत राम के सिर पर मानों दुखों का पहाड़ गिर गया। उनके दोनों छोटे बेटे हेमराज और राकेश बेरोजगार थे। इस कारण बबली ने स्वरोजगार आरंभ करने की ठानी।
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उन्होंने गांव की कुछ महिलाओं को मिला कर आदर्श स्वयं सहायता समूह का गठन किया। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए घर-द्वार तक गई और उन्हें समझाया कि परिवार का भरण-पोषण करने में महिलाएं भी आगे आ सकती हैं।
उन्होंने खेत में उगाई जाने वाली सब्जियों को बाजार में बेचना आरंभ किया। स्वयं सहायता समूह के साथ जुड़ने के बाद उन्हें सही मार्गदर्शन मिलना आरंभ हुआ। अब उनके क्लस्टर शिव भूमि स्वयं सहायता समूह से 300 महिलाएं जुड़ चुकी हैं।
अब उन्हाेंने चंबा-साहो मार्ग पर उन्होंने समूह के अधीन ही दुकान किराये पर ली है। इसमें आटा चक्की चलती है। इसके अलावा वह दुकान में सब्जियां, दूध, शहद, मशरूम, पेस्ट, पत्तल और गिलास समेत अन्य सामान की भी बिक्री करती हैं।
बबली देवी ने बताया कि अब तक उनके बेटे परमिश की स्थिति नहीं सुधर पाई है। वहीं, हेमराज (34) डेयरी की दुकान करता है और राकेश कुमार (32) एकल विद्यालय में आउटसोर्स पर शिक्षक हैं।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन जिला परियोजना अधिकारी ओपी ठाकुर के सही मार्गदर्शन के बल उनका सहायता समूह अच्छा कार्य कर रहा है। दो से तीन बार उपायुक्त चंबा भी उनके पॉलीहाउस समेत खेतों का विजिट कर उनका मार्ग दर्शन कर चुके हैं।