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Chamba News: स्कूल भवन जर्जर, किराये के कमरे और खेत में हो रही पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Thu, 08 Jan 2026 10:58 PM IST
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय बाट का भवन खस्ताहाल, भवन में आई दरारें, गिरने की कगार पर
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साहो (चंबा)। राजकीय प्राथमिक विद्यालय बाट की हालात पांच महीनों से प्रशासन और शिक्षा विभाग की लापरवाही को उजागर कर रही है। विद्यालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और कभी भी गिर सकता है। मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई निजी भवन में करवाई जा रही है, जबकि कई बार खेतों में कक्षाएं लगाने की नौबत भी आ जाती है।
जर्जर भवन के छह कमरे असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। 68 बच्चों को एक कमरे में पढ़ाना अध्यापकों के लिए भी मुश्किल हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या की जानकारी प्रशासन और शिक्षा विभाग को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य संकट में है।
विद्यालय की दयनीय हालत को लेकर अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कोई स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो वे धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
स्कूल की हालत देखकर रोज डर लगता है। बच्चों को पढ़ाई के लिए खेतों में भेजना हमारी मजबूरी बन गई है, लेकिन विभाग आंखें मूंदे बैठा है। स्कूल खंडहर में तब्दील होता है। रमेश शर्मा, अभिभावक
पांच महीने हो गए शिकायत करते-करते, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बच्चे खेतों में भी पढ़ते हैं। ठंड के मौसम में बच्चे बीमार भी पड़ सकते हैं। रवि शंकर, अभिभावक
सरकारी स्कूल होने के बावजूद बच्चों को निजी भवन में पढ़ाया जा रहा है। यह व्यवस्था कब तक चलेगी, इसका कोई जवाब नहीं है। आपदा के बाद भी स्कूल का निरीक्षण नहीं हुआ। रवि, अभिभावक
हम अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद होते नहीं देख सकते। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो सभी अभिभावक मिलकर आंदोलन करेंगे। जिम्मेवार प्रशासन और विभाग होगा। शशि शर्मा, अभिभावक
जिनके घर में कमरा लिया है वह भी कमरा खाली करने की बात कर रहे हैं। स्कूल का मरम्मत कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो वह कमरा खाली करवा देंगे। विभाग को इसकी जानकारी दे दी गई है। देवपाल सिंह, अध्यापक
शिक्षा निदेशालय और डीडीएमए को प्रस्ताव भेजा गया है। पुनः निदेशालय और डीडीएमए से इस बारे में चर्चा की जाएगी। बलवीर सिंह, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा
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जर्जर भवन के छह कमरे असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। 68 बच्चों को एक कमरे में पढ़ाना अध्यापकों के लिए भी मुश्किल हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि इस गंभीर समस्या की जानकारी प्रशासन और शिक्षा विभाग को कई बार दी जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। इसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उनका भविष्य संकट में है।
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विद्यालय की दयनीय हालत को लेकर अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कोई स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो वे धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
स्कूल की हालत देखकर रोज डर लगता है। बच्चों को पढ़ाई के लिए खेतों में भेजना हमारी मजबूरी बन गई है, लेकिन विभाग आंखें मूंदे बैठा है। स्कूल खंडहर में तब्दील होता है। रमेश शर्मा, अभिभावक
पांच महीने हो गए शिकायत करते-करते, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बच्चे खेतों में भी पढ़ते हैं। ठंड के मौसम में बच्चे बीमार भी पड़ सकते हैं। रवि शंकर, अभिभावक
सरकारी स्कूल होने के बावजूद बच्चों को निजी भवन में पढ़ाया जा रहा है। यह व्यवस्था कब तक चलेगी, इसका कोई जवाब नहीं है। आपदा के बाद भी स्कूल का निरीक्षण नहीं हुआ। रवि, अभिभावक
हम अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद होते नहीं देख सकते। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो सभी अभिभावक मिलकर आंदोलन करेंगे। जिम्मेवार प्रशासन और विभाग होगा। शशि शर्मा, अभिभावक
जिनके घर में कमरा लिया है वह भी कमरा खाली करने की बात कर रहे हैं। स्कूल का मरम्मत कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो वह कमरा खाली करवा देंगे। विभाग को इसकी जानकारी दे दी गई है। देवपाल सिंह, अध्यापक
शिक्षा निदेशालय और डीडीएमए को प्रस्ताव भेजा गया है। पुनः निदेशालय और डीडीएमए से इस बारे में चर्चा की जाएगी। बलवीर सिंह, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा