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Chamba News: छुट्टियों में न छूटे पढ़ाई तो घर पर ही जला दी शिक्षा की लौ
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
Updated Fri, 23 Jan 2026 11:04 PM IST
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चंबा में पांगी के फिंडपार में बतौर हेडमास्टर तैनात देवी चरण निर्धन परिवारों के बच्चों में जगा र
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चंबा। निष्काम भाव से समाज के सबसे कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाए पांगी के दो शिक्षक जनसेवा की मिसाल बने हुए हैं। कुलाल प्राथमिक पाठशाला में स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के तहत सेवारत शिक्षक सुरेंद्र शर्मा और राजकीय प्राथमिक पाठशाला फिंडपार में बतौर मुख्य शिक्षक तैनात देवी चरण शीतकालीन अवकाश के दौरान भी बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं।
कुलाल प्राथमिक पाठशाला में तैनात सुरेंद्र शर्मा इन दिनों अवकाश के चलते अपने गृह गांव भराड़ा में हैं। वह गांव के बच्चों को अपने घर के हॉल में पहली से आठवीं कक्षा तक की नियमित कक्षाएं लगा रहे हैं। निर्धन पृष्ठभूमि से निकलकर स्वयं संघर्षों से जूझते हुए शिक्षित बने सुरेंद्र शर्मा का जीवन प्रेरणा से भरा रहा है। छह माह की उम्र में पिता का साया उठने के बाद मां टेकी देवी ने खेतीबाड़ी कर दो बच्चों का पालन-पोषण किया। संसाधनों की कमी के चलते वह मामा के घर पढ़ने गए, जहां उन्हें मामा और उनके बेटे रमेश चंद से शिक्षा के प्रति आगे बढ़ने की दिशा मिली। आज वही सुरेंद्र शर्मा अपने अनुभवों को बच्चों के भविष्य में बदल रहे हैं। उनके संयुक्त परिवार में बुजुर्ग मां, पत्नी हरदेई, भाई चैन लाल, भाभी उमेदू देवी, दो बच्चे कल्प शर्मा और गोरीश शर्मा हैं। उन्होंने बताया कि उनके दोनों बच्चे सरकारी स्कूल में अध्ययनरत हैं।
उधर, जनजातीय क्षेत्र पांगी के राजकीय प्राथमिक पाठशाला फिंडपार में बतौर मुख्य शिक्षक सेवाएं दे रहे देवी चरण पुत्र दासु राम भी अपने घर पर ही फिंडारू गांव की बच्चों की कक्षाएं लेकर उन्हें शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
परिवार में उनके अलावा पिता दासु राम, माता सोबरी देवी और पत्नी सुमित्रा हैं। उनका बड़ा बेटा देवेंदर सिरमौर के शिलाई में बतौर नायब तहसीलदार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी बेटी दीक्षा और जितेंद्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। देवी चरण ने बताया कि अति पिछड़े क्षेत्र के बच्चों का सही मार्ग दर्शन मिलने से वे पढ़-लिखकर अपनी मेहनत के बल आगे यहीं उनकी सच्ची फीस होगी। वर्तमान में उनके घर के बरामदे और घर के आंगन में बच्चों की कक्षाएं आम तौर पर लगती हैं।
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कुलाल प्राथमिक पाठशाला में तैनात सुरेंद्र शर्मा इन दिनों अवकाश के चलते अपने गृह गांव भराड़ा में हैं। वह गांव के बच्चों को अपने घर के हॉल में पहली से आठवीं कक्षा तक की नियमित कक्षाएं लगा रहे हैं। निर्धन पृष्ठभूमि से निकलकर स्वयं संघर्षों से जूझते हुए शिक्षित बने सुरेंद्र शर्मा का जीवन प्रेरणा से भरा रहा है। छह माह की उम्र में पिता का साया उठने के बाद मां टेकी देवी ने खेतीबाड़ी कर दो बच्चों का पालन-पोषण किया। संसाधनों की कमी के चलते वह मामा के घर पढ़ने गए, जहां उन्हें मामा और उनके बेटे रमेश चंद से शिक्षा के प्रति आगे बढ़ने की दिशा मिली। आज वही सुरेंद्र शर्मा अपने अनुभवों को बच्चों के भविष्य में बदल रहे हैं। उनके संयुक्त परिवार में बुजुर्ग मां, पत्नी हरदेई, भाई चैन लाल, भाभी उमेदू देवी, दो बच्चे कल्प शर्मा और गोरीश शर्मा हैं। उन्होंने बताया कि उनके दोनों बच्चे सरकारी स्कूल में अध्ययनरत हैं।
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उधर, जनजातीय क्षेत्र पांगी के राजकीय प्राथमिक पाठशाला फिंडपार में बतौर मुख्य शिक्षक सेवाएं दे रहे देवी चरण पुत्र दासु राम भी अपने घर पर ही फिंडारू गांव की बच्चों की कक्षाएं लेकर उन्हें शिक्षा से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
परिवार में उनके अलावा पिता दासु राम, माता सोबरी देवी और पत्नी सुमित्रा हैं। उनका बड़ा बेटा देवेंदर सिरमौर के शिलाई में बतौर नायब तहसीलदार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी बेटी दीक्षा और जितेंद्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। देवी चरण ने बताया कि अति पिछड़े क्षेत्र के बच्चों का सही मार्ग दर्शन मिलने से वे पढ़-लिखकर अपनी मेहनत के बल आगे यहीं उनकी सच्ची फीस होगी। वर्तमान में उनके घर के बरामदे और घर के आंगन में बच्चों की कक्षाएं आम तौर पर लगती हैं।