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Dharamshala: दलाई लामा ने प्रवचनों से ताइवानी बौद्ध अनुयायियों को किया निहाल, हजारों पर्यटक भी रहे मौजूद
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 05 Oct 2025 06:37 AM IST
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सार
इस अवसर पर पांच हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियां और विदेशी पर्यटक उपस्थित रहे।
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- फोटो : ANI
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विस्तार
धर्मशाला शहर शनिवार सुबह उस वक्त अध्यात्म और भक्ति से सराबोर हो उठा, जब दलाई लामा ने ताइवानी बौद्ध अनुयायियों के विशेष अनुरोध पर मुख्य तिब्बती मंदिर चुगलाखांग में प्रवचन दिए। इस अवसर पर पांच हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियां और विदेशी पर्यटक उपस्थित रहे।
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प्रवचन की शुरुआत दलाई लामा ने बोधिचित्त उत्पत्ति (सेमक्ये) और बोधिसत्व व्रत (जंगदों) के संकल्प से की। इसके बाद उन्होंने तुषिता स्वर्ग के सौ देवताओं (गदेन ल्हग्यामा) पर संक्षिप्त लेकिन गहन शिक्षाएं दीं। यह अवसर श्रद्धालुओं के लिए भावनाओं से भरा रहा। धर्मशाला में यह विशेष प्रवचन एक बार फिर दुनिया को यह संदेश देता है कि दलाई लामा की करुणा और ज्ञान किसी सीमाओं में बंधे नहीं हैं। वे पूरी मानवता को जोड़ने वाली एक जीवित विरासत हैं।
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ताइवानी श्रद्धालु पैन यी शुआन ने कहा कि दलाई लामा को देखना मेरे लिए अविस्मरणीय अनुभव है। ताशी ली ने कहा कि उनकी शिक्षाएं सीधे हृदय को स्पर्श करती हैं। बौद्ध भिक्षुणी प्रो. कावेरी गिल ने कहा कि दलाई लामा केवल बौद्ध धर्म ही नहीं, बल्कि मानवता के साझा मूल्यों प्रेम, करुणा और नैतिकता के प्रतीक हैं। अमेरिका से आए ड्रू मैकग्लाथरी ने कहा कि प्रवचन अनोखा है। इसे बोधिसत्व व्रत और भी महत्वपूर्ण बनाता है।