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हिमाचल: सरकारी विद्यालयों के पुनर्जीवन पर महत्वपूर्ण शोध, कांगड़ा के शिक्षक संजय कुमार को शोध उपाधि प्रदान
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:22 PM IST
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सार
सरकारी विद्यालयों के सशक्तिकरण, शिक्षा की गुणवत्ता सुधार तथा छात्र नामांकन वृद्धि पर किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्य के लिए कांगड़ा के टीजीटी शिक्षक संजय कुमार को शोध उपाधि प्रदान की गई है। पढ़ें पूरी खबर...
टीजीटी शिक्षक संजय कुमार
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
जिला कांगड़ा के पालमपुर उपमंडल के राजकीय माध्यमिक विद्यालय खार्टी में कार्यरत टीजीटी शिक्षक संजय कुमार को सरकारी विद्यालयों के सशक्तिकरण, शिक्षा की गुणवत्ता सुधार तथा छात्र नामांकन वृद्धि पर किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्य के लिए 21 फरवरी को आयोजित पंजाब (लुधियाना) की विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शोध उपाधि प्रदान की गई। यह शोध सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs), अभिभावक सहभागिता तथा स्थानीय समुदाय की भूमिका पर आधारित एक व्यापक एवं व्यवहारिक अध्ययन है।
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वर्तमान समय में सरकारी विद्यालयों में घटता नामांकन, विद्यालयों के बंद होने की बढ़ती प्रवृत्ति तथा शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट देशभर में शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। हिमाचल प्रदेश सहित जिला कांगड़ा के संदर्भ में यह समस्या विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां कम छात्र संख्या के कारण अनेक सरकारी विद्यालयों को बंद करने या समायोजित करने की नौबत आ रही है। संजय कुमार द्वारा किया गया यह शोध न केवल प्रदेश बल्कि पूरे भारत में सरकारी विद्यालयों में घटते नामांकन की समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
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शोध में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की वास्तविक स्थिति, समुदाय की भागीदारी, विद्यालय प्रबंधन व्यवस्था तथा विभिन्न शिक्षा नीतियों के प्रभाव का गहन विश्लेषण किया गया। अध्ययन से यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया कि विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं एवं सरकारी योजनाओं की उपलब्धता के बावजूद अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी के बिना शिक्षा व्यवस्था अपेक्षित परिणाम देने में सक्षम नहीं हो पाती।
शोध में यह स्पष्ट किया गया कि समुदाय आधारित निर्णय प्रक्रिया, अभिभावक सहभागिता, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग से सरकारी विद्यालयों में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, शिक्षा की गुणवत्ता तथा छात्र नामांकन में उल्लेखनीय सुधार संभव है। शिक्षा सुधार हेतु संजय कुमार ने एक सहभागी एवं व्यवहारिक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसमें सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन (PRA) तथा SARAR (Self-esteem, Associative Strength, Resourcefulness, Action Planning and Responsibility) जैसे नवाचार आधारित दृष्टिकोण को प्रभावी बताया गया है।
इस शोध की विशेषता यह रही कि इसमें केवल सैद्धांतिक अध्ययन ही नहीं, बल्कि संजय कुमार के 26 वर्षों के शैक्षिक अनुभव, विद्यालय स्तर पर किए गए नवाचार प्रयोगों , समुदाय को ट्रैनिंग शैली, तथा विभिन्न केस स्टडी को भी शामिल किया गया। उनके प्रयासों के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों में सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम, सामाजिक संवाद, संसाधन मानचित्रण, प्रशिक्षण कार्यशालाएं तथा सहभागिता आधारित शैक्षिक गतिविधियों को सफलतापूर्वक लागू किया गया, जिससे शिक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ी तथा छात्र नामांकन में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
शिक्षाविदों के अनुसार यह शोध शिक्षा नीति निर्माताओं, विद्यालय प्रबंधन संस्थाओं तथा प्रशासनिक तंत्र के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा और सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण एवं सहभागी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।