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हिमाचल: पंचकर्म से धीमी हो सकती है उम्र बढ़ने की प्रक्रिया, राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज पपरोला के शोध में दावा
सौरभ सूद, धर्मशाला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 15 Apr 2026 10:13 AM IST
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सार
पपरोला स्थित राजीव गांधी स्नातकोत्तर राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में हुए एक ताजा शोध में दावा किया गया है कि पंचकर्म की वमन क्रिया से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है यानि इस प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है। पढ़ें पूरी खबर...
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
क्या उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा सकता है? इस सवाल का वैज्ञानिक जवाब अब आयुर्वेद के क्षेत्र से सामने आने लगा है। पपरोला स्थित राजीव गांधी स्नातकोत्तर राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में हुए एक ताजा शोध में दावा किया गया है कि पंचकर्म की वमन क्रिया उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा करने में प्रभावी हो सकती है।
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आयुर्वेद विभाग के सहयोग से किए गए इस अध्ययन के अनुसार, वमन कर्म से शरीर में मौजूद ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में उल्लेखनीय कमी देखी गई। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को उम्र बढ़ने व कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है। वमन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह शोध वसंतिक वमनोत्सव के दौरान 18 दिन तक नियंत्रित क्लीनिकल ट्रायल के रूप में किया गया। 18 से 60 वर्ष आयु के 40 प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया।
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एक समूह को वमन कर्म कराया गया, दूसरा नियंत्रण समूह रहा। प्रोटोकॉल के तहत प्रतिभागियों को 3 से 7 दिन तक शुद्ध घी का सेवन कराया गया। इसके बाद अभ्यंग और स्वेदन (वमन की क्रियाएं) की प्रक्रिया अपनाई गई। वमन से पहले विशेष आहार के जरिये से कफ को सक्रिय किया गया और तय दिन पर नियंत्रित वमन कराया गया। इसके बाद 3 से 7 दिन तक नियंत्रित आहार योजना लागू की गई।
शोध के सभी जैव-रासायनिक परीक्षण कृषि पालमपुर के कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज में किए गए। शोधकर्ताओं का दावा है कि परिणाम वैज्ञानिक मानकों पर खरे उतरे।
शोध के 5 बड़े संकेत
- ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में उल्लेखनीय गिरावट
- एंटीऑक्सीडेंट ग्लूटाथायोन के स्तर में बढ़ोतरी
- मेटाबॉलिज्म व मानसिक स्थिति में सुधार
- कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल में सकारात्मक बदलाव
- इम्युनिटी मजबूत और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी
शोध के सूत्रधार
पंचकर्म विभाग के शोधार्थी डॉ. पंकज कश्यप ने यह शोध किया है। इसे आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटी पर प्रमाणित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियों की जड़ में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस अहम कारक है। यदि इस दिशा में और व्यापक शोध होते हैं तो आयुर्वेद वैश्विक स्तर पर स्वस्थ दीर्घायु का मार्गदर्शक बन सकता है। - अनिल भारद्वाज, अध्यक्ष, पंचकर्म विभाग, आयुर्वेदिक महाविद्यालय पपरोला
पंचकर्म विभाग के शोधार्थी डॉ. पंकज कश्यप ने यह शोध किया है। इसे आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटी पर प्रमाणित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग जैसी बीमारियों की जड़ में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस अहम कारक है। यदि इस दिशा में और व्यापक शोध होते हैं तो आयुर्वेद वैश्विक स्तर पर स्वस्थ दीर्घायु का मार्गदर्शक बन सकता है। - अनिल भारद्वाज, अध्यक्ष, पंचकर्म विभाग, आयुर्वेदिक महाविद्यालय पपरोला

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