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Hamirpur (Himachal) News: सबूतों के अभाव में गैर इरादतन हत्या मामले के चारों आरोपी बरी
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हमीरपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हमीरपुर की अदालत ने वर्ष 2020 के बहुचर्चित कल्पेबल होमीसाइड (गैर इरादतन हत्या) मामले में चारों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन रघु ने मुख्य गवाहों के बयान बदलने, अभियोजन पक्ष के आरोप सिद्ध न कर पाने तथा महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत न होने के आधार पर आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया। आरोपियों में एक पुलिसकर्मी भी शामिल था।
अभियोजन के अनुसार जुलाई 2020 में भोरंज क्षेत्र के मुंडखर निवासी राकेश को बड़सर तहसील के दसवीं गांव में चोरी के संदेह में पकड़ लिया गया था। आरोप था कि चार लोगों ने उसे रस्सी से बांधकर डंडों, लात-घूसों से पीटा, जिससे गंभीर चोटें आईं और अगले दिन उसकी मौत हो गई।
हालांकि, सुनवाई के दौरान घटना के सभी प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत में किसी भी तरह की सामूहिक मारपीट से इनकार किया। कुछ गवाहों ने बताया कि मौके पर पहुंचे एक पुलिसकर्मी ने केवल पूछताछ के दौरान दो-तीन थप्पड़ मारे थे। वहीं, पुलिस द्वारा राकेश को साथ ले जाने और मौके पर छोड़ने को लेकर गवाहों और पुलिसकर्मी के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया।
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अदालत ने यह भी माना कि मृतक की मां और भाई ने जिस वायरल वीडियो का हवाला दिया था, वह न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जा सका। मामले से संबंधित डीवीडी भी क्रप्ट पाई गई, जिससे वीडियो साक्ष्य का परीक्षण संभव नहीं हो सका। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गंभीर चोटों से उत्पन्न शॉक बताया गया, लेकिन बरामद डंडे को भी निर्णायक साक्ष्य नहीं माना गया।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। परिणामस्वरूप चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए सम्मानपूर्वक बरी कर दिया गया।
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अभियोजन के अनुसार जुलाई 2020 में भोरंज क्षेत्र के मुंडखर निवासी राकेश को बड़सर तहसील के दसवीं गांव में चोरी के संदेह में पकड़ लिया गया था। आरोप था कि चार लोगों ने उसे रस्सी से बांधकर डंडों, लात-घूसों से पीटा, जिससे गंभीर चोटें आईं और अगले दिन उसकी मौत हो गई।
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हालांकि, सुनवाई के दौरान घटना के सभी प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गए। उन्होंने अदालत में किसी भी तरह की सामूहिक मारपीट से इनकार किया। कुछ गवाहों ने बताया कि मौके पर पहुंचे एक पुलिसकर्मी ने केवल पूछताछ के दौरान दो-तीन थप्पड़ मारे थे। वहीं, पुलिस द्वारा राकेश को साथ ले जाने और मौके पर छोड़ने को लेकर गवाहों और पुलिसकर्मी के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया।
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अदालत ने यह भी माना कि मृतक की मां और भाई ने जिस वायरल वीडियो का हवाला दिया था, वह न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जा सका। मामले से संबंधित डीवीडी भी क्रप्ट पाई गई, जिससे वीडियो साक्ष्य का परीक्षण संभव नहीं हो सका। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गंभीर चोटों से उत्पन्न शॉक बताया गया, लेकिन बरामद डंडे को भी निर्णायक साक्ष्य नहीं माना गया।
सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। परिणामस्वरूप चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए सम्मानपूर्वक बरी कर दिया गया।