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Hamirpur (Himachal) News: चेक बाउंस मामले में दोषी की अपील खारिज, सजा बरकरार
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 07 Apr 2026 07:55 AM IST
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निचली अदालत ने 6 महीने की जेल और 4.70 लाख जुर्माने की सुनाई थी सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हमीरपुर राजेश तोमर की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की 6 महीने की कैद और मुआवजे की सजा को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता सुरिंदर पाल निवासी गांव पंजाली, डाकघर डुग्घा, जिला हमीरपुर ने कुशल निवासी गांव जसौर, डाकघर डुग्घा, के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। शिकायतकर्ता की ओर मामले की पैरवी अधिवक्ता रोहित शर्मा व लोक अभियोजक अजय ठाकुर ने की है। आरोपी ने अगस्त 2018 में अपनी निजी जरूरतों के लिए सुरिंदर पाल से 3,50,000 उधार लिए थे। इस पैसे को लौटाने के लिए उन्होंने जून 2019 का एक पोस्ट-डेटेड चेक दिया था। जब शिकायतकर्ता ने यह चेक बैंक में लगाया, तो खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण वह बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद जब पैसे नहीं लौटाए गए, तो यह मामला अदालत पहुंचा। अक्टूबर 2024 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हमीरपुर ने आरोपित को धारा 138 के तहत दोषी पाया था। उन्हें 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई गई।
और 4,70,000 का जुर्माना लगाया गया जिसमें से 4.65 लाख शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर मिलने थे। कुशल कुमार ने इस सजा के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपीलकर्ता की दलील थी कि उन्होंने कोई लोन नहीं लिया था और उनके सुरक्षा चेक का गलत इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश राजेश तोमर ने पाया कि अपीलकर्ता के पास अपनी बात साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं थे।
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हमीरपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हमीरपुर राजेश तोमर की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की 6 महीने की कैद और मुआवजे की सजा को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता सुरिंदर पाल निवासी गांव पंजाली, डाकघर डुग्घा, जिला हमीरपुर ने कुशल निवासी गांव जसौर, डाकघर डुग्घा, के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। शिकायतकर्ता की ओर मामले की पैरवी अधिवक्ता रोहित शर्मा व लोक अभियोजक अजय ठाकुर ने की है। आरोपी ने अगस्त 2018 में अपनी निजी जरूरतों के लिए सुरिंदर पाल से 3,50,000 उधार लिए थे। इस पैसे को लौटाने के लिए उन्होंने जून 2019 का एक पोस्ट-डेटेड चेक दिया था। जब शिकायतकर्ता ने यह चेक बैंक में लगाया, तो खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण वह बाउंस हो गया। कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद जब पैसे नहीं लौटाए गए, तो यह मामला अदालत पहुंचा। अक्टूबर 2024 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हमीरपुर ने आरोपित को धारा 138 के तहत दोषी पाया था। उन्हें 6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई गई।
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और 4,70,000 का जुर्माना लगाया गया जिसमें से 4.65 लाख शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर मिलने थे। कुशल कुमार ने इस सजा के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपीलकर्ता की दलील थी कि उन्होंने कोई लोन नहीं लिया था और उनके सुरक्षा चेक का गलत इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश राजेश तोमर ने पाया कि अपीलकर्ता के पास अपनी बात साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं थे।