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Baba Balak Nath Temple: बाबा बालक नाथ मंदिर के चढ़ावे में बड़ा खेल? 99 ग्राम चांदी कर दी गायब; ऐसे हुआ खुलासा
Tue, 14 Jul 2026 09:41 AM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, दियोटसिद्ध (हमीरपुर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, दियोटसिद्ध (हमीरपुर)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 14 Jul 2026 09:41 AM IST
सार
Baba Balak Nath Temple: हमीरपुर के दियोटसिद्ध स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में चढ़ावे की चांदी के रिकॉर्ड में विभागीय ऑडिट के दौरान गंभीर अनियमितता सामने आई है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 110 ग्राम चांदी को स्टॉक रजिस्टर में केवल 11.099 ग्राम दर्ज किया गया। रिकॉर्ड में करीब 99 ग्राम का अंतर मिलने पर मंदिर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन ऑडिट पूरा होने तक कोई जवाब नहीं मिला। पढ़ें पूरी खबर...
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बाबा बालक नाथ मंदिर
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
उत्तरी भारत के सुप्रसिद्ध सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर, दियोटसिद्ध में चढ़ावे के रूप में प्राप्त चांदी के रिकॉर्ड में एक गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। विभागीय ऑडिट में यह खुलासा हुआ है कि एक श्रद्धालु द्वारा दान की गई 110 ग्राम चांदी को मंदिर के स्टॉक रजिस्टर में मात्र 11.099 ग्राम दर्ज किया गया। इस प्रकार, लगभग 99 ग्राम चांदी का हिसाब रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
ऑडिट में खुलासे और मंदिर प्रशासन की चुप्पी
यह मामला दिसंबर 2021 का है, जब श्रद्धालु राकेश जैन ने मंदिर में 110 ग्राम चांदी का दान दिया था। हालांकि, उस समय स्टॉक रजिस्टर में इसकी प्रविष्टि केवल 11 ग्राम 099 मिलीग्राम के रूप में की गई। विभागीय अंकेक्षण (ऑडिट) के दौरान जब यह विसंगति सामने आई, तो ऑडिट टीम ने मंदिर प्रशासन से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा। रिपोर्ट के अनुसार, अंकेक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक मंदिर प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल
इस घटना से यह सवाल उठता है कि आखिर 110 ग्राम चांदी की जगह स्टॉक रजिस्टर में इतनी कम मात्रा किस आधार पर दर्ज की गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। दान में प्राप्त सामग्री के रिकॉर्ड में इस तरह की बड़ी चूक न केवल श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंचाती है, बल्कि मंदिर के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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ऑडिट में खुलासे और मंदिर प्रशासन की चुप्पी
यह मामला दिसंबर 2021 का है, जब श्रद्धालु राकेश जैन ने मंदिर में 110 ग्राम चांदी का दान दिया था। हालांकि, उस समय स्टॉक रजिस्टर में इसकी प्रविष्टि केवल 11 ग्राम 099 मिलीग्राम के रूप में की गई। विभागीय अंकेक्षण (ऑडिट) के दौरान जब यह विसंगति सामने आई, तो ऑडिट टीम ने मंदिर प्रशासन से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा। रिपोर्ट के अनुसार, अंकेक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक मंदिर प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
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जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल
इस घटना से यह सवाल उठता है कि आखिर 110 ग्राम चांदी की जगह स्टॉक रजिस्टर में इतनी कम मात्रा किस आधार पर दर्ज की गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। दान में प्राप्त सामग्री के रिकॉर्ड में इस तरह की बड़ी चूक न केवल श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंचाती है, बल्कि मंदिर के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
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मंदिर अधिकारी का बयान
जब इस मामले में बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट के कार्यकारी मंदिर अधिकारी पवन कुमार भाटिया से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड देखने के बाद ही वे इस संबंध में कुछ कह पाएंगे। उनके इस बयान से फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
भविष्य की कार्रवाई और अपेक्षाएं
यह उम्मीद की जाती है कि मंदिर प्रबंधन इस मामले की गहन जांच करेगा और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए दान की गई सामग्री के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उपाय किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े ऐसे पवित्र स्थानों पर प्रबंधन की ओर से अत्यंत सावधानी और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।
जब इस मामले में बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट के कार्यकारी मंदिर अधिकारी पवन कुमार भाटिया से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड देखने के बाद ही वे इस संबंध में कुछ कह पाएंगे। उनके इस बयान से फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
भविष्य की कार्रवाई और अपेक्षाएं
यह उम्मीद की जाती है कि मंदिर प्रबंधन इस मामले की गहन जांच करेगा और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए दान की गई सामग्री के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उपाय किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े ऐसे पवित्र स्थानों पर प्रबंधन की ओर से अत्यंत सावधानी और जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है।