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Datia By Election: भाजपा या कांग्रेस किधर रुख करेंगे नाराज चल रहे अवधेश नायक? जानें अपनी पोस्ट पर क्या लिखा

Tue, 14 Jul 2026 09:51 AM IST
दतिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया Published by: दतिया ब्यूरो Updated Tue, 14 Jul 2026 09:51 AM IST
सार

दतिया उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस में जबरदस्त टक्कर देखने को मिल रही है। वहीं, कांग्रेस पार्टी से नाराज चल रहे पार्टी के विधानसभा क्षेत्र के बड़े नेता अवधेश नायक की नाराजगी चर्चा में है। वो पार्टी की गतिविधियों से दूर हैं। चलिए जानते हैं उन्होंने क्या कहा है इस विषय पर?

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Unity in the BJP is visible, but Congress leader Awadhesh Nayak is missing from the rally and
भाजपा-कांग्रेस के नेताओं के साथ संवाद करते हुए अवधेश नायाक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दतिया विधानसभा उपचुनाव में नामांकन का दिन सिर्फ शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। राजनीतिक दलों के लिए असली परीक्षा अपने नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लाने की रही। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ने नामांकन से पहले संगठन में एकजुटता का संदेश देने की भरपूर कोशिश की, लेकिन तस्वीर दोनों दलों में अलग-अलग नजर आई। वहीं, अब नामांकन फॉर्म भरने के बाद दोनों दलों की नजर अवधेश नायक पर टिकी हई है।
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गौरतलब है कि भाजपा ने जहां पिछले दो दिनों में संगठन के भीतर चल रही नाराजगी को काफी हद तक शांत कर एकजुटता का प्रदर्शन किया, वहीं कांग्रेस के सामने वरिष्ठ नेता अवधेश नायक की नाराजगी चर्चा का केंद्र बनी रही। आमसभा में बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद नायक की गैरहाजिरी कई सवाल छोड़ गई।
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भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन से पहले पार्टी नेतृत्व लगातार सक्रिय रहा। टिकट वितरण के बाद नाराज बताए जा रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं से वरिष्ठ नेताओं ने व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क किया। संगठन की ओर से संवाद और समन्वय की रणनीति अपनाई गई, जिसका असर नामांकन के दिन साफ दिखाई दिया।
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पार्टी के कई वरिष्ठ चेहरे, जो पिछले कुछ समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए थे, मंच पर एक साथ दिखाई दिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की साझा मौजूदगी को भी संगठनात्मक एकजुटता के संदेश के रूप में देखा गया। भाजपा ने यह संकेत देने की कोशिश की कि चुनाव में पूरा संगठन एकजुट होकर मैदान में है।

नायक की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी
कांग्रेस ने भी नामांकन के बाद बड़ी आमसभा आयोजित कर अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह सहित कई प्रमुख नेता मंच पर मौजूद रहे। हालांकि, इस शक्ति प्रदर्शन के बीच वरिष्ठ नेता अवधेश नायक की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। पार्टी के बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद नायक का कार्यक्रम से दूर रहना संगठन के भीतर चल रही नाराजगी की ओर इशारा करता रहा।

'कुछ गलतफहमियां हुई थीं'
सभा के दौरान दिग्विजय सिंह ने अपने संबोधन में अवधेश नायक का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ गलतफहमियां हुई थीं। राजनीतिक हलकों में इसे रिश्तों में आई खटास दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। हालांकि, मंच से दिए गए इस संदेश के बावजूद नायक कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

'राजनीति में सभी विकल्प खुले रहते हैं'
मीडिया से चर्चा के दौरान अवधेश नायक ने प्रदेश नेतृत्व के प्रति अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त की। उन्होंने कहा कि टिकट वितरण के दौरान उनके साथ न्याय नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी किसी व्यक्ति विशेष से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है, लेकिन पार्टी नेतृत्व के फैसलों से वे आहत हैं। भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने इतना ही कहा कि राजनीति में सभी विकल्प खुले रहते हैं। इस बयान ने दतिया की राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया।

अपनी पोस्ट पर जानें क्या-क्या लिखा है नायक ने?
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए नायक ने लिखा कि मेरे निवास पर कांग्रेस-भाजपा दोनों दलों के प्रत्याशी भेंट करने आए थे। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कांग्रेस के सांसद, विधायक पूर्व मंत्री संगठन के नेतागण कांग्रेस पार्टी के भी आए थे। अभी मैंने कोई निर्णय नहीं लिया है। बसई अंचल सहित ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकर्ताओं साथियों से चर्चा शेष है, जो एक दो दिन में हो जाएगी। निर्णय दतिया के हित में ही होगा। किसी भी भ्रम में कोई न रहे और किसी की भी कही बात मेरी न मानी जाए।


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नायक की नाराजगी किस पर पड़ेगी भारी?
कांग्रेस द्वारा जारी स्टार प्रचारकों की सूची में भी अवधेश नायक का नाम शामिल नहीं किया गया। लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी और सूची से नाम गायब रहने के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य घटना नहीं मान रहे हैं। माना जा रहा है कि चुनावी माहौल में यह मुद्दा कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है।



 
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