{"_id":"6a551e22e056dec6bb029a46","slug":"students-will-now-learn-lessons-on-disaster-preparedness-every-month-hamirpur-hp-news-c-94-1-ssml1011-200689-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: अब हर माह आपदा से बचाव का पाठ पढ़ेंगे विद्यार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: अब हर माह आपदा से बचाव का पाठ पढ़ेंगे विद्यार्थी
Tue, 14 Jul 2026 10:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 14 Jul 2026 10:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। जिले के सभी सरकारी स्कूलों में अब विद्यार्थियों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि उन्हें आपदा के समय खुद को सुरक्षित रखने और दूसरों की मदद करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में प्रत्येक माह नियमित रूप से आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्कूल स्तर पर छात्रों और शिक्षकों को भूकंप, आग, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार करना है।
मॉक ड्रिल के दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार, राहत एवं बचाव कार्य, आपातकालीन संपर्क व्यवस्था और जोखिम से बचाव के उपाय सिखाए जाएंगे।
विज्ञापन
इसके अलावा प्रत्येक माह जागरूकता कार्यक्रम, सुरक्षा शपथ, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता, आपदा प्रबंधन पर व्याख्यान और मॉक रेस्क्यू जैसी गतिविधियां भी आयोजित होंगी। इन कार्यक्रमों में स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा।
तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आपदा में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। नियमित मॉक ड्रिल से बच्चों में घबराहट कम होती है, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और वे जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद भी कर सकते हैं। ऐसे अभ्यास स्कूलों में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
रिपोर्ट भी भेजनी होगी : स्कूल प्रभारियों को प्रत्येक माह आयोजित गतिविधियों और मॉक ड्रिल की विस्तृत रिपोर्ट उपनिदेशक कार्यालय में भेजनी होगी। विभाग इन रिपोर्टों के आधार पर कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा।
प्रत्येक माह आयोजित होने वाली गतिविधियों से बच्चों में जागरूकता बढ़ेगी और वे राहत एवं बचाव से जुड़े आवश्यक उपायों को व्यावहारिक रूप से सीख सकेंगे। -कमल किशोर, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर
विज्ञापन
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में प्रत्येक माह नियमित रूप से आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्कूल स्तर पर छात्रों और शिक्षकों को भूकंप, आग, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार करना है।
विज्ञापन
मॉक ड्रिल के दौरान विद्यार्थियों को सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार, राहत एवं बचाव कार्य, आपातकालीन संपर्क व्यवस्था और जोखिम से बचाव के उपाय सिखाए जाएंगे।
विज्ञापन
इसके अलावा प्रत्येक माह जागरूकता कार्यक्रम, सुरक्षा शपथ, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर एवं निबंध प्रतियोगिता, आपदा प्रबंधन पर व्याख्यान और मॉक रेस्क्यू जैसी गतिविधियां भी आयोजित होंगी। इन कार्यक्रमों में स्थानीय प्रशासन, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा।
तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी आपदा में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। नियमित मॉक ड्रिल से बच्चों में घबराहट कम होती है, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और वे जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद भी कर सकते हैं। ऐसे अभ्यास स्कूलों में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
रिपोर्ट भी भेजनी होगी : स्कूल प्रभारियों को प्रत्येक माह आयोजित गतिविधियों और मॉक ड्रिल की विस्तृत रिपोर्ट उपनिदेशक कार्यालय में भेजनी होगी। विभाग इन रिपोर्टों के आधार पर कार्यक्रमों की समीक्षा करेगा और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा।
प्रत्येक माह आयोजित होने वाली गतिविधियों से बच्चों में जागरूकता बढ़ेगी और वे राहत एवं बचाव से जुड़े आवश्यक उपायों को व्यावहारिक रूप से सीख सकेंगे। -कमल किशोर, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर