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Hamirpur (Himachal) News: नादौन के पूर्व एसएचओ नीरज राणा पर भ्रष्टाचार मामले में आरोप तय
Mon, 20 Jul 2026 12:37 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 20 Jul 2026 12:37 AM IST
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नादौन थाना के पूर्व एसएचओ नीरज राणा।
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एक्सक्लूसिव
डिस्चार्ज याचिका खारिज, अब रिश्वत और साक्ष्य मिटाने के आरोपों में चलेगा ट्रायल
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। वर्ष 2021 के चर्चित रिश्वत प्रकरण में नादौन थाना के तत्कालीन प्रभारी नीरज राणा को अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश पंकज शर्मा की अदालत ने पूर्व एसएचओ की डिस्चार्ज (मामले से बरी करने) की याचिका खारिज करते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 और आईपीसी की धारा-201 (साक्ष्य नष्ट करने) के तहत आरोप तय कर दिए हैं।
अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई होगी और आरोपों पर ट्रायल चलेगा। मामला 21 दिसंबर 2021 का है। विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि तत्कालीन एसएचओ नादौन ने 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी है।
शिकायतकर्ता ने कथित बातचीत अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली थी। शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने जाल बिछाया, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही आरोपी कथित तौर पर रिश्वत की राशि लेकर वाहन में भाग गया।
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जांच के दौरान आरोपी ने वाहन की चाबियां, मोबाइल फोन और अन्य आवश्यक सामग्री जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराई। इसी आधार पर मामले में साक्ष्य छिपाने और नष्ट करने का आरोप भी जोड़ा गया।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि रिश्वत की राशि बरामद नहीं हुई और कॉल रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्ट भी स्पष्ट नहीं है, इसलिए आरोपी को मामले से मुक्त किया जाए। लोक अभियोजक अजय ठाकुर ने इसका विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी मौके से भाग गया था, इसलिए रिश्वत की बरामदगी संभव नहीं हो सकी।
उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल) मंडी की रिपोर्ट में रिकॉर्ड की गई आवाज का आरोपी की आवाज से मिलान हो चुका है।
विशेष न्यायाधीश पंकज शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि उपलब्ध सामग्री से आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जाता।
केवल रिश्वत की राशि बरामद न होना आरोपी को राहत देने का आधार नहीं हो सकता। इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की प्रमाणिकता का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाएगा।
मामले पर एक नजर
पीड़ित कारोबारी ने विजिलेंस में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि मवेशियों को पठानकोट ले जाने की अनुमति देने के बदले तत्कालीन एसएचओ नादौन 25 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने ट्रैप लगाया, लेकिन आरोपी कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेकर वाहन से भाग गया। आरोप है कि भागते समय उसने विजिलेंस टीम पर वाहन चढ़ाने का प्रयास भी किया, जिससे अधिकारी बाल-बाल बच गए। इसके बाद विजिलेंस ने भ्रष्टाचार और साक्ष्य छिपाने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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डिस्चार्ज याचिका खारिज, अब रिश्वत और साक्ष्य मिटाने के आरोपों में चलेगा ट्रायल
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। वर्ष 2021 के चर्चित रिश्वत प्रकरण में नादौन थाना के तत्कालीन प्रभारी नीरज राणा को अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश पंकज शर्मा की अदालत ने पूर्व एसएचओ की डिस्चार्ज (मामले से बरी करने) की याचिका खारिज करते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 और आईपीसी की धारा-201 (साक्ष्य नष्ट करने) के तहत आरोप तय कर दिए हैं।
अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई होगी और आरोपों पर ट्रायल चलेगा। मामला 21 दिसंबर 2021 का है। विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि तत्कालीन एसएचओ नादौन ने 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी है।
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शिकायतकर्ता ने कथित बातचीत अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर ली थी। शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने जाल बिछाया, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही आरोपी कथित तौर पर रिश्वत की राशि लेकर वाहन में भाग गया।
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जांच के दौरान आरोपी ने वाहन की चाबियां, मोबाइल फोन और अन्य आवश्यक सामग्री जांच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराई। इसी आधार पर मामले में साक्ष्य छिपाने और नष्ट करने का आरोप भी जोड़ा गया।
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि रिश्वत की राशि बरामद नहीं हुई और कॉल रिकॉर्डिंग की ट्रांसक्रिप्ट भी स्पष्ट नहीं है, इसलिए आरोपी को मामले से मुक्त किया जाए। लोक अभियोजक अजय ठाकुर ने इसका विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी मौके से भाग गया था, इसलिए रिश्वत की बरामदगी संभव नहीं हो सकी।
उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल) मंडी की रिपोर्ट में रिकॉर्ड की गई आवाज का आरोपी की आवाज से मिलान हो चुका है।
विशेष न्यायाधीश पंकज शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि उपलब्ध सामग्री से आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जाता।
केवल रिश्वत की राशि बरामद न होना आरोपी को राहत देने का आधार नहीं हो सकता। इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की प्रमाणिकता का परीक्षण ट्रायल के दौरान किया जाएगा।
मामले पर एक नजर
पीड़ित कारोबारी ने विजिलेंस में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि मवेशियों को पठानकोट ले जाने की अनुमति देने के बदले तत्कालीन एसएचओ नादौन 25 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत के आधार पर विजिलेंस ने ट्रैप लगाया, लेकिन आरोपी कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेकर वाहन से भाग गया। आरोप है कि भागते समय उसने विजिलेंस टीम पर वाहन चढ़ाने का प्रयास भी किया, जिससे अधिकारी बाल-बाल बच गए। इसके बाद विजिलेंस ने भ्रष्टाचार और साक्ष्य छिपाने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।