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Hamirpur (Himachal) News: न मेडिकल कॉलेज को मिला अपना कैंपस, न युद्ध स्मारक के बदले हालात
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:49 AM IST
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हमीरपुर। प्रदेश कांग्रेस सरकार के पहले बजट में मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को एक वर्ष के भीतर क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर से नए कैंपस में शिफ्ट करने की घोषणा तीन वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को नए कैंपस में शिफ्ट करने का वादा तीन साल पहले सीएम सुक्खू ने अपने पहले बजट भाषण में किया था, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी कॉलेज क्षेत्रीय अस्पताल के तंग ढांचे में ही सांस ले रहा है। भीड़, अव्यवस्था और संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को यहां इलाज से पहले इन अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ता है।
वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। आठ साल गुजर गए, लेकिन नया कैंपस अभी तक लोर्कापित नहीं नहीं हो पाया। ओपीडी के बाहर कतारें एक विभाग से दूसरे विभाग तक फैल रही हैं। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं। ऑपरेशन थियेटर के बाहर तीमारदार जमीन पर इंतजार करते दिखते हैं। छोटे-से कमरों में पांच-पांच डॉक्टर बैठकर मरीज देख रहे हैं और यहां पर चलने तक की जगह नहीं है।
जोलसप्पड़ स्थित निर्माणाधीन कैंपस पर करीब 376 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। भवन लगभग तैयार है। अड़चन सिर्फ 17 करोड़ रुपये के फर्नीचर और औपचारिक प्रक्रियाओं की है, जो तीन वर्षों से फाइलों में उलझी हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कई समीक्षा बैठकें कर चुके हैं, लेकिन शिफ्टिंग की ठोस तारीख अब भी तय नहीं। एडमिन ब्लाक और अस्पताल में फर्नीचर लगाया जाना है जोकि लगभग तीन वर्ष से फाइलों में ही बंद है। सीएम सुक्खू इस कॉलेज को कांग्रेस की यूपीए सरकार की देन बतातें है जबकि सांसद अनुराग ठाकुर इसे भाजपा की उपलब्धि गिनाते हैं। श्रेय लेने की होड़ के बीच यह प्रोजेक्ट प्रथम चरण के निर्माण पूरा होने की डेडलाइन से चार वर्ष आगे पहुंच गया है लेकिन अभी तक कैंपस लोकार्पित नहीं हो सका है।
वीरभूमि का सम्मान अधूरा
शहीद कैप्टन मृदुल शर्मा स्मारक को युद्ध स्मारक में तब्दील करने की योजना भी अधर में है। दो बार शिलान्यास, लेकिन काम केवल 30 प्रतिशत। 70 लाख रुपये की परियोजना में अब तक महज 13 लाख रुपये जारी हुए। पिछले दो वर्षों से निर्माण बंद है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि वीरभूमि कहे जाने वाले जिले में बलिदानियों के सम्मान का प्रोजेक्ट आखिर प्राथमिकता क्यों नहीं बन पा रहा? युद्ध स्मारक के नाम पर यहां पर महज बलिदानी कैप्टन मृदुल शर्मा की प्रतिमा ही बनी है। भाजपा सरकार में इसका शिलान्यास किया गया और फिर बजट जारी करने के ऐलान के साथ मौजूदा सरकार ने दोबारा वर्ष 2023 में इसका शिलान्यास किया लेकिन हालात जस के तस हैं।
वादे और हकीकत
-पिछले तीन बजट में जिले के लिए करीब 20 बड़े प्रोजेक्ट घोषित किए गए।
-केवल छह परियोजनाओं पर जमीनी कार्य शुरू हो पाया।
-आठ से दस परियोजनाएं टेंडर या जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में हैं।
-सात से आठ घोषणाओं के लिए अब तक बजट प्रावधान ही नहीं।
-नादौन का प्रस्तावित इलेक्ट्रिक बस डिपो अब भी डीपीआर स्तर पर अटका है।
-बल्क मिल्क चिलिंग सेंटर के लिए जमीन चयन प्रक्रिया लंबित है।
लोगों की आवाज
ओपीडी में बैठने तक की सुविधा नहीं है। हर साल नए कैंपस की बात होती है, लेकिन हालात जस के तस हैं।”
- निशा देवी, निवासी मासला, धर्मपुर
दो साल से युद्ध स्मारक अधर में है। यह बलिदानियों का अपमान है।
- वरुण चंदेल, निवासी अवाहदेवी
ओपीडी के छोटे कमरे में पांच-छह डॉक्टर बैठे हैं। मरीजों के चलने की जगह नहीं है। नया कैंपस तैयार है तो शुरू क्यों नहीं किया जा रहा।
- ध्यान सिंह, निवासी संगरोह
वीरभूमि में बलिदानियों के सम्मान का प्रोजेक्ट ही अधूरा है। दो-दो शिलान्यास के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ।
- सुखदेव सिंह, निवासी बगवाड़ा
मेडिकल कॉलेज में प्रथम चरण का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। नए कैंपस में फर्नीचर लगाने का कार्य ही शेष बचा है। जल्द ही नए कैंपस में कॉलेज शिफ्ट होगा।
-- - डाक्टर रमेश भारती, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
सरकार से युद्ध स्मारक के लिए बजट की मांग की गई है। जब सरकार से बजट मंजूर होगा रूका हुआ कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-- - बिग्रेडियर मदनशील शर्मा, निदेशक, सैनिक कल्याण विभाग
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वर्ष 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। आठ साल गुजर गए, लेकिन नया कैंपस अभी तक लोर्कापित नहीं नहीं हो पाया। ओपीडी के बाहर कतारें एक विभाग से दूसरे विभाग तक फैल रही हैं। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं। ऑपरेशन थियेटर के बाहर तीमारदार जमीन पर इंतजार करते दिखते हैं। छोटे-से कमरों में पांच-पांच डॉक्टर बैठकर मरीज देख रहे हैं और यहां पर चलने तक की जगह नहीं है।
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जोलसप्पड़ स्थित निर्माणाधीन कैंपस पर करीब 376 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। भवन लगभग तैयार है। अड़चन सिर्फ 17 करोड़ रुपये के फर्नीचर और औपचारिक प्रक्रियाओं की है, जो तीन वर्षों से फाइलों में उलझी हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कई समीक्षा बैठकें कर चुके हैं, लेकिन शिफ्टिंग की ठोस तारीख अब भी तय नहीं। एडमिन ब्लाक और अस्पताल में फर्नीचर लगाया जाना है जोकि लगभग तीन वर्ष से फाइलों में ही बंद है। सीएम सुक्खू इस कॉलेज को कांग्रेस की यूपीए सरकार की देन बतातें है जबकि सांसद अनुराग ठाकुर इसे भाजपा की उपलब्धि गिनाते हैं। श्रेय लेने की होड़ के बीच यह प्रोजेक्ट प्रथम चरण के निर्माण पूरा होने की डेडलाइन से चार वर्ष आगे पहुंच गया है लेकिन अभी तक कैंपस लोकार्पित नहीं हो सका है।
वीरभूमि का सम्मान अधूरा
शहीद कैप्टन मृदुल शर्मा स्मारक को युद्ध स्मारक में तब्दील करने की योजना भी अधर में है। दो बार शिलान्यास, लेकिन काम केवल 30 प्रतिशत। 70 लाख रुपये की परियोजना में अब तक महज 13 लाख रुपये जारी हुए। पिछले दो वर्षों से निर्माण बंद है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि वीरभूमि कहे जाने वाले जिले में बलिदानियों के सम्मान का प्रोजेक्ट आखिर प्राथमिकता क्यों नहीं बन पा रहा? युद्ध स्मारक के नाम पर यहां पर महज बलिदानी कैप्टन मृदुल शर्मा की प्रतिमा ही बनी है। भाजपा सरकार में इसका शिलान्यास किया गया और फिर बजट जारी करने के ऐलान के साथ मौजूदा सरकार ने दोबारा वर्ष 2023 में इसका शिलान्यास किया लेकिन हालात जस के तस हैं।
वादे और हकीकत
-पिछले तीन बजट में जिले के लिए करीब 20 बड़े प्रोजेक्ट घोषित किए गए।
-केवल छह परियोजनाओं पर जमीनी कार्य शुरू हो पाया।
-आठ से दस परियोजनाएं टेंडर या जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया में हैं।
-सात से आठ घोषणाओं के लिए अब तक बजट प्रावधान ही नहीं।
-नादौन का प्रस्तावित इलेक्ट्रिक बस डिपो अब भी डीपीआर स्तर पर अटका है।
-बल्क मिल्क चिलिंग सेंटर के लिए जमीन चयन प्रक्रिया लंबित है।
लोगों की आवाज
ओपीडी में बैठने तक की सुविधा नहीं है। हर साल नए कैंपस की बात होती है, लेकिन हालात जस के तस हैं।”
- निशा देवी, निवासी मासला, धर्मपुर
दो साल से युद्ध स्मारक अधर में है। यह बलिदानियों का अपमान है।
- वरुण चंदेल, निवासी अवाहदेवी
ओपीडी के छोटे कमरे में पांच-छह डॉक्टर बैठे हैं। मरीजों के चलने की जगह नहीं है। नया कैंपस तैयार है तो शुरू क्यों नहीं किया जा रहा।
- ध्यान सिंह, निवासी संगरोह
वीरभूमि में बलिदानियों के सम्मान का प्रोजेक्ट ही अधूरा है। दो-दो शिलान्यास के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ।
- सुखदेव सिंह, निवासी बगवाड़ा
मेडिकल कॉलेज में प्रथम चरण का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। नए कैंपस में फर्नीचर लगाने का कार्य ही शेष बचा है। जल्द ही नए कैंपस में कॉलेज शिफ्ट होगा।
सरकार से युद्ध स्मारक के लिए बजट की मांग की गई है। जब सरकार से बजट मंजूर होगा रूका हुआ कार्य शुरू कर दिया जाएगा।