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Hamirpur (Himachal) News: आयुर्वेदिक उपचार में बढ़ा मरीजों का भरोसा
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 03 May 2026 12:54 AM IST
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आयुर्वेदिक अस्पताल में कपिंग थेरेपी से मरीज का इलाज। स्रोत : आयुर्वेदिक विभाग
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हमीरपुर। आयुर्वेदिक अस्पताल लंबलू में आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से मरीजों का प्रभावी इलाज किया जा रहा है। कपिंग थेरेपी, टेंस और पंचकर्म जैसी विधियों से उपचार करवाने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वर्तमान में यहां करीब 18 मरीज इन तीनों पद्धतियों से उपचार ले रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या 10 से 12 के बीच थी। अस्पताल में विशेष रूप से सर्वाइकल दर्द, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं वाले मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं।
इन बीमारियों में टेंस थेरेपी दर्द को कम करने में सहायक साबित हो रही है, वहीं कपिंग थेरेपी शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाकर राहत प्रदान करती है। पंचकर्म प्रक्रिया शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर रोग की जड़ पर असर करती है।
आयुर्वेदिक चिकित्सकों का दावा है कि इस पद्धति से मरीजों को बिना किसी दुष्प्रभाव के धीरे-धीरे लेकिन स्थायी लाभ मिलता है। घुटनों, गर्दन, पीठ और कमर से संबंधित पुराने और गंभीर रोगों का इलाज पंचकर्म और पेरासर्जिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा रहा है।
वहीं, पेरासर्जिकल प्रक्रिया आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो रोगों के सुरक्षित और प्रभावी प्रबंधन में सहायक है। इस संबंध में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी लंबलू, डॉ. अंकुश के अनुसार, मरीज यहां उपचार के साथ-साथ विशेषज्ञ परामर्श के लिए भी आ सकते हैं।
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वर्तमान में यहां करीब 18 मरीज इन तीनों पद्धतियों से उपचार ले रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या 10 से 12 के बीच थी। अस्पताल में विशेष रूप से सर्वाइकल दर्द, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं वाले मरीज अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं।
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इन बीमारियों में टेंस थेरेपी दर्द को कम करने में सहायक साबित हो रही है, वहीं कपिंग थेरेपी शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाकर राहत प्रदान करती है। पंचकर्म प्रक्रिया शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर रोग की जड़ पर असर करती है।
आयुर्वेदिक चिकित्सकों का दावा है कि इस पद्धति से मरीजों को बिना किसी दुष्प्रभाव के धीरे-धीरे लेकिन स्थायी लाभ मिलता है। घुटनों, गर्दन, पीठ और कमर से संबंधित पुराने और गंभीर रोगों का इलाज पंचकर्म और पेरासर्जिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा रहा है।
वहीं, पेरासर्जिकल प्रक्रिया आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो रोगों के सुरक्षित और प्रभावी प्रबंधन में सहायक है। इस संबंध में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी लंबलू, डॉ. अंकुश के अनुसार, मरीज यहां उपचार के साथ-साथ विशेषज्ञ परामर्श के लिए भी आ सकते हैं।