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Hamirpur (Himachal) News: पेठा-पपीते की बड़ियों ने बदली चंपा की जिंदगी
Mon, 29 Jun 2026 12:26 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 29 Jun 2026 12:26 AM IST
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किरवीं की चंपा देवी घर पर सीरा तैयार करते हुए। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। किरवीं गांव की चंपा देवी ने पारंपरिक खाद्य उत्पादों को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। पेठे और पपीते की बड़ियों से शुरू हुआ उनका छोटा सा प्रयास आज परिवार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है।
चंपा देवी ने कुछ वर्ष पहले पेठे और पपीते की बड़ियां बनाने का कार्य शुरू किया था। शुरुआत में वह परिवार और आसपास के लोगों की मांग के अनुसार सीमित मात्रा में उत्पाद तैयार करती थीं। गुणवत्ता और स्वाद के कारण उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई, जिसके बाद उन्होंने इसे व्यवसायिक रूप देने का निर्णय लिया।
वर्तमान में चंपा देवी पेठे और पपीते की बड़ियों के अलावा दाल की बड़ियां और गेहूं का सीरा तैयार कर स्थानीय बाजार में सप्लाई कर रही हैं। उनके उत्पाद आसपास की दुकानों के साथ-साथ सीधे ग्राहकों तक भी पहुंच रहे हैं।
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चंपा देवी ने बताया कि शुरुआत में यह कार्य अतिरिक्त आय के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन आज यह परिवार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। वर्तमान में वह प्रतिमाह करीब सात से दस हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
उनकी सफलता से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
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हमीरपुर। किरवीं गांव की चंपा देवी ने पारंपरिक खाद्य उत्पादों को स्वरोजगार का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। पेठे और पपीते की बड़ियों से शुरू हुआ उनका छोटा सा प्रयास आज परिवार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है।
चंपा देवी ने कुछ वर्ष पहले पेठे और पपीते की बड़ियां बनाने का कार्य शुरू किया था। शुरुआत में वह परिवार और आसपास के लोगों की मांग के अनुसार सीमित मात्रा में उत्पाद तैयार करती थीं। गुणवत्ता और स्वाद के कारण उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई, जिसके बाद उन्होंने इसे व्यवसायिक रूप देने का निर्णय लिया।
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वर्तमान में चंपा देवी पेठे और पपीते की बड़ियों के अलावा दाल की बड़ियां और गेहूं का सीरा तैयार कर स्थानीय बाजार में सप्लाई कर रही हैं। उनके उत्पाद आसपास की दुकानों के साथ-साथ सीधे ग्राहकों तक भी पहुंच रहे हैं।
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चंपा देवी ने बताया कि शुरुआत में यह कार्य अतिरिक्त आय के उद्देश्य से शुरू किया गया था, लेकिन आज यह परिवार की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। वर्तमान में वह प्रतिमाह करीब सात से दस हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
उनकी सफलता से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।