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कर्मचारियों को राहत और बड़े पदों पर कटौती सराहनीय फैसला : विवेक
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:54 AM IST
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हमीरपुर। कांग्रेस नेता विवेक कटोच ने प्रदेश सरकार द्वारा कठिन वित्तीय परिस्थितियों के बावजूद कर्मचारियों, दिहाड़ीदारों और विभिन्न वर्गों के हित में लिए गए फैसलों का स्वागत किया है। मीडिया को दिए बयान में उन्होंने कहा कि यह निर्णय दर्शाता है कि मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में सरकार आम कर्मचारी और गरीब वर्ग के साथ खड़ी है।
विवेक कटोच ने कहा कि दिहाड़ीदारों की मजदूरी बढ़ाकर 450 रुपये प्रतिदिन करना और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 13,750 रुपये प्रतिमाह तय करना एक ऐतिहासिक कदम है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, मिड-डे मील वर्कर्स, पंचायत चौकीदारों और अन्य वर्गों के मानदेय में वृद्धि से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी जनहित सर्वोपरि है।
उन्होंने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को वेतन कटौती से पूरी तरह बाहर रखा है, जिससे छोटे कर्मचारियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति पिछली भाजपा सरकार की गलत नीतियों और कमजोर आर्थिक प्रबंधन का परिणाम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए फैसले लिए, जिससे आज प्रदेश पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा अपनी तनख़्वाह में 50 प्रतिशत कटौती और अपने मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करना एक साहसिक और नैतिक निर्णय है, जो जनता के प्रति जवाबदेही को दर्शाता है।
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विवेक कटोच ने कहा कि दिहाड़ीदारों की मजदूरी बढ़ाकर 450 रुपये प्रतिदिन करना और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 13,750 रुपये प्रतिमाह तय करना एक ऐतिहासिक कदम है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, मिड-डे मील वर्कर्स, पंचायत चौकीदारों और अन्य वर्गों के मानदेय में वृद्धि से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद भी जनहित सर्वोपरि है।
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उन्होंने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों को वेतन कटौती से पूरी तरह बाहर रखा है, जिससे छोटे कर्मचारियों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति पिछली भाजपा सरकार की गलत नीतियों और कमजोर आर्थिक प्रबंधन का परिणाम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए फैसले लिए, जिससे आज प्रदेश पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा अपनी तनख़्वाह में 50 प्रतिशत कटौती और अपने मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने वेतन का हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित करना एक साहसिक और नैतिक निर्णय है, जो जनता के प्रति जवाबदेही को दर्शाता है।