PM Modi: पीएम मोदी ने किया 'पावर लॉकडाउन' का जिक्र, ईंधन संकट की आशंका के बीच माइलेज बढ़ाने के आसान तरीके
वैश्विक तनाव और ईंधन से जुड़ी चिंताओं के बीच, गाड़ी चलाने की स्मार्ट आदतें, जैसे कि धीरे-धीरे गति बढ़ाना, गाड़ी को बेवजह चालू न रखना और सही रखरखाव, माइलेज को अधिकतम करने और ईंधन की लागत को कम करने में मदद कर सकती हैं।
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार की अनिश्चितता के बीच ऊर्जा सुरक्षा फिर से चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने संबोधन में कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात लंबे समय तक चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
अपने संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री ने ईरान-इस्राइल-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष और महामारी के दौर के संकट के बीच तुलना की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कैसे दोनों ही स्थितियों में वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं (सप्लाई चेन) बाधित हुईं। भले ही इसके कारण अलग-अलग रहे हों।
उन्होंने कहा, "इस युद्ध के कारण, वैश्विक स्तर पर बनी यह कठिन स्थिति लंबे समय तक जारी रह सकती है। इसलिए, हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और एकजुट बने रहना होगा। हमने कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी एकजुट रहकर ऐसी चुनौतियों का सामना किया है। हमें बेहद सावधान और सतर्क रहने की आवश्यकता है। कुछ लोग इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए अफवाहें फैलाने का प्रयास करेंगे। हमें ऐसे लोगों को सफल नहीं होने देना है।"
हालांकि उन्होंने किसी “लॉकडाउन” की घोषणा नहीं की। लेकिन उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर “पावर लॉकडाउन” जैसी संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई।
क्या अन्य देशों में ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं?
इसके साथ ही, अन्य देशों में हो रहे घटनाक्रम ऐसे संकटों के दूरगामी प्रभावों को रेखांकित करते हैं। कई देशों में ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अलग-अलग कदम उठाए जा रहे हैं:
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श्रीलंका: स्कूल और गैर-जरूरी सरकारी दफ्तरों में छुट्टी
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बांग्लादेश: ऑनलाइन क्लासेस और तय बिजली कटौती
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पाकिस्तान और फिलीपींस: सरकारी कर्मचारियों के लिए 4-दिन का वर्क वीक
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वियतनाम: रिमोट वर्क को बढ़ावा
इन कदमों से साफ है कि ऊर्जा बचत को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है।
क्या भारत में भी ऐसा कोई खतरा है?
हालांकि, विशेषज्ञ यह मानते हैं कि फिलहाल भारत में लॉकडाउन जैसी स्थिति की संभावना नहीं है। फिर भी सप्लाई में रुकावट और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में, हर लीटर ईंधन का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना, रोजाना कार चलाने वालों के लिए एक व्यावहारिक प्राथमिकता बन जाता है। यहां ड्राइविंग की कुछ ऐसी मुख्य आदतें बताई गई हैं, जो ऐसे अनिश्चित समय में ईंधन की बचत बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
क्या ड्राइविंग स्टाइल बदलने से माइलेज बढ़ सकता है?
हां, ड्राइविंग का तरीका माइलेज पर सीधा असर डालता है।
अचानक एक्सीलेरेशन, बार-बार ब्रेक लगाना और तेज लेन बदलना ईंधन की खपत बढ़ाते हैं।
इसके बजाय स्मूद ड्राइविंग, जैसे धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाना और ट्रैफिक को समझकर चलना, ईंधन बचाने में मदद करता है।
क्या स्थिर स्पीड बनाए रखना जरूरी है?
बिल्कुल, बार-बार स्पीड बदलने से इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और ईंधन ज्यादा खर्च होता है।
हाईवे पर एक समान रफ्तार बनाए रखना और शहर में ट्रैफिक को पहले से समझकर चलना माइलेज बेहतर करता है।
क्या इंजन चालू रखना नुकसानदायक है?
हां, लंबे समय तक गाड़ी को बिना चलाए इंजन चालू रखना (आइडलिंग) ईंधन की बर्बादी करता है।
लंबे सिग्नल या इंतजार के दौरान इंजन बंद करना एक आसान आदत है जो ईंधन बचा सकती है।
क्या वाहन की सही देखभाल से फर्क पड़ता है?
बिल्कुल, अच्छी तरह मेंटेन की गई गाड़ी ज्यादा बेहतर माइलेज देती है।
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सही टायर प्रेशर
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साफ एयर फिल्टर
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समय पर इंजन ऑयल बदलना
ये सभी चीजें ईंधन की खपत कम करने में मदद करती हैं।
क्या वजन और ट्रिप प्लानिंग भी मायने रखती है?
हां, गाड़ी में ज्यादा वजन होने से इंजन पर दबाव बढ़ता है और ईंधन ज्यादा खर्च होता है।
इसके अलावा:
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अनावश्यक सामान हटाएं
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एक ही ट्रिप में कई काम निपटाएं
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भीड़भाड़ वाले समय से बचें
इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होती है।
अच्छी ड्राइविंग आदत अपनाएं
भले ही वैश्विक हालात ईंधन की कीमतों और उपलब्धता को प्रभावित करें। लेकिन सही ड्राइविंग आदतें अपनाकर आप अपने खर्च को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।
थोड़े से बदलाव से न सिर्फ माइलेज बढ़ेगा, बल्कि आपकी जेब पर भी कम असर पड़ेगा।