Gas Crisis: गैस संकट से ऑटो सप्लाई चेन पर असर, क्या कंपोनेंट सप्लायर्स कंपनियों ने अपनाया 'प्लान बी'?
भारत के वाहन निर्माता अपनी उत्पादन प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। क्योंकि ईरान युद्ध के कारण औद्योगिक गैस की किल्लत लगातार गहराती जा रही है।
विस्तार
ईरान युद्ध के चलते औद्योगिक गैस की कमी ने भारत के ऑटो सेक्टर की सप्लाई चेन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इस संकट की वजह से कई छोटे सप्लायर्स ने उत्पादन रोक दिया है, जिससे ऑटो कंपनियों को अब वैकल्पिक रणनीतियां अपनानी पड़ रही हैं।
किन कंपनियों पर असर पड़ रहा है?
इस सप्लाई संकट का असर पूरे ऑटो इकोसिस्टम पर पड़ रहा है।
बड़े ऑटोमेकर जैसे:
-
टाटा मोटर्स
-
महिंद्रा एंड महिंद्रा
-
अशोक लेलैंड
-
रॉयल एनफील्ड
-
फॉक्सवैगन
-
निसान
इन सभी की निर्भरता छोटे सप्लायर्स (टियर-2 और टियर-3) पर है, जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
छोटे सप्लायर्स क्यों बंद हो रहे हैं?
महाराष्ट्र के चाकन, पिंपरी-चिंचवड और संभाजीनगर जैसे ऑटो हब सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
यहां के कई छोटे उद्योग गैस की कमी के कारण बंद हो चुके हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन इलाकों में एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस), जो मेटल कटिंग, वेल्डिंग और कोटिंग में जरूरी होती है, की भारी कमी है और इसका कोई आसान विकल्प नहीं है।
क्या उत्पादन पर तुरंत असर पड़ा है?
अभी तक बड़ी कंपनियों ने अपने स्टॉक (30-45 दिन का इन्वेंटरी) के सहारे उत्पादन जारी रखा है।
लेकिन कई छोटे यूनिट्स ने 10 दिन तक उत्पादन रोक दिया है, जिससे आगे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
कंपनियां ‘Plan B’ में क्या कर रही हैं?
ऑटो कंपनियां अब वैकल्पिक रणनीतियां अपना रही हैं:
-
कुछ पार्ट्स खुद (इन-हाउस) बनाने की तैयारी
-
सप्लायर्स को गैस उपलब्ध कराने में मदद
-
सप्लाई चेन की लगातार निगरानी
क्या अभी उत्पादन सुरक्षित है?
फिलहाल बड़ी कंपनियां कह रही हैं कि उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ है, खासकर मार्च जैसे अहम महीने में।
लेकिन अगर संकट लंबा चलता है, तो स्थिति बिगड़ सकती है।
क्या मांग भी ज्यादा है?
रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार में मांग काफी मजबूत है:
-
जनवरी में पैसेंजर व्हीकल बिक्री 13 प्रतिशत बढ़ी
-
टू-व्हीलर बिक्री 26 प्रतिशत बढ़ी
-
फरवरी में भी बढ़ोतरी जारी रही
यानी मांग ज्यादा है, लेकिन सप्लाई में जोखिम बढ़ रहा है।
आगे क्या खतरा है?
अगर गैस की कमी लंबी चली, तो:
-
सप्लाई चेन टूट सकती है
-
उत्पादन में रुकावट आ सकती है
-
पूरे ऑटो सेक्टर की स्थिरता प्रभावित हो सकती है
छोटे सप्लायर्स पर संकट
अभी ऑटो कंपनियां अपने स्टॉक और ‘प्लान बी’ के जरिए स्थिति संभाल रही हैं। लेकिन असली चुनौती छोटे सप्लायर्स के संकट में है।
अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर पूरे ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ सकता है।