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Hamirpur (Himachal) News: अपने स्तर पर पर्ची शुल्क नहीं खर्च पाएंगी आरकेएस, फंड ट्रेजरी में होगा जमा
Wed, 15 Jul 2026 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:35 AM IST
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कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोगी कल्याण समितियों (आरकेएस) की वित्तीय स्वायत्तता में बड़ा बदलाव किया गया है। अब अस्पतालों में पर्ची शुल्क और विभिन्न स्वास्थ्य जांचों से होने वाली आय को आरकेएस अपने स्तर पर खर्च नहीं कर सकेंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला, क्षेत्रीय, सिविल और अन्य सरकारी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह राशि अब संबंधित जिले के कोषागार (ट्रेजरी) में स्वास्थ्य विभाग के अलग मद के तहत जमा होगी। इसके बाद किसी भी मद में खर्च के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक होगी।
अब तक अस्पतालों में आरकेएस की बैठक में प्रस्ताव पारित कर मरीजों की सुविधाओं, उपकरणों की खरीद, छोटे निर्माण कार्यों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर यह राशि खर्च कर दी जाती थी, लेकिन नए निर्देशों के बाद आरकेएस केवल प्रस्ताव भेज सकेगी, जबकि अंतिम मंजूरी सरकार देगी और स्वीकृति मिलने पर ही ट्रेजरी से राशि जारी होगी।
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प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में अभी पर्ची शुल्क लागू नहीं है, लेकिन प्रयोगशाला जांच, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और अन्य स्वास्थ्य परीक्षणों से हर अस्पताल को नियमित आय होती है। बड़े अस्पतालों में यह राशि सालाना करोड़ों रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में इस पूरे फंड का संचालन अब सीधे सरकारी नियंत्रण में आ जाएगा।
स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से सभी जिलों को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि आरकेएस के माध्यम से प्राप्त होने वाली आय को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रेजरी में जमा कराया जाए। इसके बाद किसी भी खर्च के लिए सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
पिछले साल लिया था पर्ची शुल्क लागू करने का फैसला
प्रदेश सरकार ने जून 2025 में सरकारी अस्पतालों में पर्ची शुल्क लागू करने का निर्णय लिया था। हालांकि विरोध के बाद सरकार ने इसे अनिवार्य न रखते हुए आरकेएस पर फैसला छोड़ दिया था। इसी कारण प्रदेश के अधिकांश अस्पतालों में आज भी पर्ची शुल्क लागू नहीं हो पाया है। हमीरपुर जिले में केवल डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और सिविल अस्पताल बड़सर में ही पर्ची शुल्क लिया जा रहा है, जबकि जिले के अन्य सिविल अस्पतालों में यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हुई है। प्रदेश के अधिकांश जिलों की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है।
कोट
पर्ची शुल्क और अन्य स्वास्थ्य जांचों से प्राप्त होने वाली राशि अब ट्रेजरी में जमा करवाई जाएगी। इस संबंध में स्वास्थ्य निदेशालय से निर्देश प्राप्त हुए हैं। आरकेएस को इस फंड के खर्च के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी। -अजय अत्री, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हमीरपुर
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हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोगी कल्याण समितियों (आरकेएस) की वित्तीय स्वायत्तता में बड़ा बदलाव किया गया है। अब अस्पतालों में पर्ची शुल्क और विभिन्न स्वास्थ्य जांचों से होने वाली आय को आरकेएस अपने स्तर पर खर्च नहीं कर सकेंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला, क्षेत्रीय, सिविल और अन्य सरकारी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह राशि अब संबंधित जिले के कोषागार (ट्रेजरी) में स्वास्थ्य विभाग के अलग मद के तहत जमा होगी। इसके बाद किसी भी मद में खर्च के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक होगी।
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अब तक अस्पतालों में आरकेएस की बैठक में प्रस्ताव पारित कर मरीजों की सुविधाओं, उपकरणों की खरीद, छोटे निर्माण कार्यों और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर यह राशि खर्च कर दी जाती थी, लेकिन नए निर्देशों के बाद आरकेएस केवल प्रस्ताव भेज सकेगी, जबकि अंतिम मंजूरी सरकार देगी और स्वीकृति मिलने पर ही ट्रेजरी से राशि जारी होगी।
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प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में अभी पर्ची शुल्क लागू नहीं है, लेकिन प्रयोगशाला जांच, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और अन्य स्वास्थ्य परीक्षणों से हर अस्पताल को नियमित आय होती है। बड़े अस्पतालों में यह राशि सालाना करोड़ों रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में इस पूरे फंड का संचालन अब सीधे सरकारी नियंत्रण में आ जाएगा।
स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से सभी जिलों को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि आरकेएस के माध्यम से प्राप्त होने वाली आय को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रेजरी में जमा कराया जाए। इसके बाद किसी भी खर्च के लिए सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
पिछले साल लिया था पर्ची शुल्क लागू करने का फैसला
प्रदेश सरकार ने जून 2025 में सरकारी अस्पतालों में पर्ची शुल्क लागू करने का निर्णय लिया था। हालांकि विरोध के बाद सरकार ने इसे अनिवार्य न रखते हुए आरकेएस पर फैसला छोड़ दिया था। इसी कारण प्रदेश के अधिकांश अस्पतालों में आज भी पर्ची शुल्क लागू नहीं हो पाया है। हमीरपुर जिले में केवल डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और सिविल अस्पताल बड़सर में ही पर्ची शुल्क लिया जा रहा है, जबकि जिले के अन्य सिविल अस्पतालों में यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हुई है। प्रदेश के अधिकांश जिलों की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है।
कोट
पर्ची शुल्क और अन्य स्वास्थ्य जांचों से प्राप्त होने वाली राशि अब ट्रेजरी में जमा करवाई जाएगी। इस संबंध में स्वास्थ्य निदेशालय से निर्देश प्राप्त हुए हैं। आरकेएस को इस फंड के खर्च के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी। -अजय अत्री, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हमीरपुर