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Hamirpur (Himachal) News: छह साल से बंद पड़े स्कूल भवन हो रहे जर्जर
Sun, 19 Jul 2026 12:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 19 Jul 2026 12:52 AM IST
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जर्जर हालत में लगदेवी और कड़ियार स्थित प्राथमिक विद्यालय। संवाद
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ऊहल (हमीरपुर)। विकास खंड बमसन के तहत लगदेवी और कड़ियार स्थित प्राथमिक विद्यालय पिछले छह वर्षों से अधिक समय से उपयोग में नहीं हैं। लाखों रुपये की लागत से निर्मित इन सरकारी भवनों की देखरेख न होने से ये धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों की संख्या कम होने के कारण इन स्कूलों को बंद कर दिया गया था। लंबे समय से खाली होने के कारण सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों में नरेश, विजय, अजय, रोहित, ध्यान सिंह, सहदेव, विधि चंद और राजेंद्र आदि के अनुसार यह समस्या केवल ऊहल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में ऐसे अनेक सरकारी स्कूल भवन वर्षों से खाली पड़े हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से प्रदेशभर में ऐसे भवनों का सर्वे करवाकर उनकी सूची तैयार करने और इनके प्रभावी उपयोग के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है।
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उन्होंने सुझाव दिया कि कई सरकारी कार्यालय अभी भी किराये की इमारतों में संचालित हो रहे हैं। खाली पड़े सरकारी भवनों की आवश्यक मरम्मत कर उन्हें उपयोग योग्य बनाया जाए तो इन सरकारी कार्यालयों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने कहा कि इससे सरकारी धन की बचत होगी और करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्तियों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की मांग की है।
कोट
स्कूल भवनों की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी गई है। भवनों के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन ही निर्णय लेने के लिए अधिकृत है। -कमल किशोर, उपनिदेशक, प्राथमिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर
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स्थानीय लोगों ने बताया कि बच्चों की संख्या कम होने के कारण इन स्कूलों को बंद कर दिया गया था। लंबे समय से खाली होने के कारण सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है।
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ग्रामीणों में नरेश, विजय, अजय, रोहित, ध्यान सिंह, सहदेव, विधि चंद और राजेंद्र आदि के अनुसार यह समस्या केवल ऊहल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई जिलों में ऐसे अनेक सरकारी स्कूल भवन वर्षों से खाली पड़े हैं। उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से प्रदेशभर में ऐसे भवनों का सर्वे करवाकर उनकी सूची तैयार करने और इनके प्रभावी उपयोग के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है।
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उन्होंने सुझाव दिया कि कई सरकारी कार्यालय अभी भी किराये की इमारतों में संचालित हो रहे हैं। खाली पड़े सरकारी भवनों की आवश्यक मरम्मत कर उन्हें उपयोग योग्य बनाया जाए तो इन सरकारी कार्यालयों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है।
ग्रामीणों ने कहा कि इससे सरकारी धन की बचत होगी और करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्तियों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की मांग की है।
कोट
स्कूल भवनों की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी गई है। भवनों के उपयोग को लेकर जिला प्रशासन ही निर्णय लेने के लिए अधिकृत है। -कमल किशोर, उपनिदेशक, प्राथमिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर

जर्जर हालत में लगदेवी और कड़ियार स्थित प्राथमिक विद्यालय। संवाद