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Hamirpur (Himachal) News: हैंड बैग बनाकर सीमा ने मजबूत की आर्थिक स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:31 AM IST
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सौर पंचायत की सीमा द्वारा घर पर तैयार किया गया हैंड बैग। संवाद
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हमीरपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहीं महिलाएं आज न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव की बुनियाद रख रही हैं।
सौर पंचायत की सीमा ने हैंड बैग तैयार कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और अब अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं। सीमा ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। बढ़ती महंगाई और सीमित आय के कारण घर का खर्च चलाना कठिन होता जा रहा था। ऐसे में घर बैठे हैंड बैग बनाने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आर्थिकी को सहारा मिल सके।
शुरुआत में काम की ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन जल्द ही गांव में स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से बैग बनाने का प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के दौरान बैग की डिजाइन, सिलाई, कढ़ाई, कच्चे माल की पहचान और बाजार की मांग के बारे में जानकारी मिली। प्रशिक्षण के बाद घर पर ही सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया।
शुरुआत में उन्होंने साधारण कपड़े के बैग बनाए, जिन्हें स्थानीय हाट-बाजार में बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके बनाए बैग लोगों को पसंद आने लगे। त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में उनके बैगों की मांग बढ़ जाती है। अब सीमा हर महीने हैंड बैग बेचकर 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
यह आय उनके परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। इससे बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य जरूरतें आसानी से पूरी हो पा रही हैं। सीमा गांव की अन्य महिलाओं को भी हैंड बैग बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं, जिससे उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
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सौर पंचायत की सीमा ने हैंड बैग तैयार कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और अब अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं। सीमा ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। बढ़ती महंगाई और सीमित आय के कारण घर का खर्च चलाना कठिन होता जा रहा था। ऐसे में घर बैठे हैंड बैग बनाने का निर्णय लिया, ताकि परिवार की आर्थिकी को सहारा मिल सके।
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शुरुआत में काम की ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन जल्द ही गांव में स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से बैग बनाने का प्रशिक्षण मिला। प्रशिक्षण के दौरान बैग की डिजाइन, सिलाई, कढ़ाई, कच्चे माल की पहचान और बाजार की मांग के बारे में जानकारी मिली। प्रशिक्षण के बाद घर पर ही सीमित संसाधनों के साथ काम शुरू किया।
शुरुआत में उन्होंने साधारण कपड़े के बैग बनाए, जिन्हें स्थानीय हाट-बाजार में बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उनके बनाए बैग लोगों को पसंद आने लगे। त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में उनके बैगों की मांग बढ़ जाती है। अब सीमा हर महीने हैंड बैग बेचकर 10 से 12 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
यह आय उनके परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। इससे बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य जरूरतें आसानी से पूरी हो पा रही हैं। सीमा गांव की अन्य महिलाओं को भी हैंड बैग बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं, जिससे उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।

सौर पंचायत की सीमा द्वारा घर पर तैयार किया गया हैंड बैग। संवाद