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Hamirpur (Himachal) News: स्लॉट पूरा हो गया है, अब अगले सप्ताह आइए
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 02 Jan 2026 01:19 AM IST
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राकेश शर्मा उपप्रधान पंचायत बड़सर
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ग्राउंड रिपोर्ट
बड़सर में अल्ट्रासाउंड के लिए भटक रहे मरीज, गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ रही परेशानी
सिविल अस्पताल में सिर्फ शनिवार को ही मिल रही अल्ट्रासाउंड की सुविधा, स्थायी रेडियोलॉजिस्ट न होने से मरीज परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़सर (हमीरपुर)। स्लॉट पूरा हो गया है… अगर अल्ट्रासाउंड करवाना है तो अगले शनिवार आइए। सिविल अस्पताल बड़सर में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहुंचने वाले लगभग हर मरीज को यही जवाब मिल रहा है। हालात ऐसे हैं कि अगर किसी का नंबर 40 के बाद आता है, तो उसे मजबूरी में पूरे एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है या फिर निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है।
दोपहर का समय है। अस्पताल परिसर अपेक्षाकृत शांत है, लेकिन लैब के बाहर खड़े कुछ चेहरे चिंता और मजबूरी बयां कर रहे हैं। पूछने पर नाम न बताने की शर्त पर मरीज बताते हैं कि पेट दर्द और अन्य गंभीर समस्या के चलते अल्ट्रासाउंड जरूरी है, लेकिन शनिवार का टोकन मिलने के बाद अब निजी अस्पताल जाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
सिविल अस्पताल बड़सर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध तो है, लेकिन स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण जांच केवल सप्ताह में एक दिन शनिवार को ही की जा रही है। वह भी भोरंज से आने वाली विशेषज्ञ डॉक्टर के भरोसे है। अस्थायी व्यवस्था के तहत भोरंज खंड से डॉ. प्रीति चौधरी शनिवार को अस्पताल पहुंचकर लगभग 40 मरीजों का अल्ट्रासाउंड करती हैं।
भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए पहले से स्लॉट और टोकन दिए जाते हैं, लेकिन इससे जरूरतमंद मरीजों की परेशानी कम नहीं हो पा रही।
गर्भवती महिलाओं पर ज्यादा असर
बड़सर उपमंडल की बड़ी आबादी सीधे तौर पर इसी अस्पताल पर निर्भर है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और गंभीर रोगी अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच के लिए सप्ताह में केवल एक दिन मिलने वाली सुविधा के भरोसे हैं। कई बार मजबूरी में उन्हें निजी लैब या अस्पताल में महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ती है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
कोट्स
सिविल अस्पताल बड़सर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा सप्ताह में केवल एक ही बार मिलती है। अगर किसी ने अपना अल्ट्रसाउंड करवाना हो तो उसे शनिवार तक इंतजार करना पड़ता है या फिर बाहर निजी क्षेत्र में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। -चत्तर सिंह कौशल, टिप्पर पंचायत प्रधान
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों को निजी अस्पतालों में महंगे दाम पर अल्ट्रसाउंड करवाना पड़ता है। हैरानी की बात है कि यहां पर स्थायी विशेषज्ञ ही तैनात नहीं किया जा रहा है। -राकेश शर्मा, उपप्रधान, पंचायत बड़सर
सिविल अस्पताल बड़सर में भोरंज से विशेषज्ञ आते हैं। दस से अधिक पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले अस्पताल में सप्ताह में एक बार ही अल्ट्रासाउंड किए जाने की व्यवस्था सही नहीं है। सरकार को यहां पर स्थायी विशेषज्ञ तैनात करना चाहिए, ताकि दिक्कतें पेश न आएं। -डॉ. सीमा शर्मा, स्थानीय निवासी
सरकार लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर सरकार के नुमाइंदों तथा जनप्रतिनिधियों को देखना चाहिए कि लोगों को किस प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। सप्ताह में केवल एक दिन अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है। -करतार सिंह, स्थानीय निवासी
अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है, ऐसे में भोरंज से विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। -अरविंद टंडन, बीएमओ, बड़सर
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बड़सर में अल्ट्रासाउंड के लिए भटक रहे मरीज, गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ रही परेशानी
सिविल अस्पताल में सिर्फ शनिवार को ही मिल रही अल्ट्रासाउंड की सुविधा, स्थायी रेडियोलॉजिस्ट न होने से मरीज परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़सर (हमीरपुर)। स्लॉट पूरा हो गया है… अगर अल्ट्रासाउंड करवाना है तो अगले शनिवार आइए। सिविल अस्पताल बड़सर में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहुंचने वाले लगभग हर मरीज को यही जवाब मिल रहा है। हालात ऐसे हैं कि अगर किसी का नंबर 40 के बाद आता है, तो उसे मजबूरी में पूरे एक सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है या फिर निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है।
दोपहर का समय है। अस्पताल परिसर अपेक्षाकृत शांत है, लेकिन लैब के बाहर खड़े कुछ चेहरे चिंता और मजबूरी बयां कर रहे हैं। पूछने पर नाम न बताने की शर्त पर मरीज बताते हैं कि पेट दर्द और अन्य गंभीर समस्या के चलते अल्ट्रासाउंड जरूरी है, लेकिन शनिवार का टोकन मिलने के बाद अब निजी अस्पताल जाना ही एकमात्र विकल्प बचा है।
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सिविल अस्पताल बड़सर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध तो है, लेकिन स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण जांच केवल सप्ताह में एक दिन शनिवार को ही की जा रही है। वह भी भोरंज से आने वाली विशेषज्ञ डॉक्टर के भरोसे है। अस्थायी व्यवस्था के तहत भोरंज खंड से डॉ. प्रीति चौधरी शनिवार को अस्पताल पहुंचकर लगभग 40 मरीजों का अल्ट्रासाउंड करती हैं।
भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए पहले से स्लॉट और टोकन दिए जाते हैं, लेकिन इससे जरूरतमंद मरीजों की परेशानी कम नहीं हो पा रही।
गर्भवती महिलाओं पर ज्यादा असर
बड़सर उपमंडल की बड़ी आबादी सीधे तौर पर इसी अस्पताल पर निर्भर है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और गंभीर रोगी अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच के लिए सप्ताह में केवल एक दिन मिलने वाली सुविधा के भरोसे हैं। कई बार मजबूरी में उन्हें निजी लैब या अस्पताल में महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ती है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
कोट्स
सिविल अस्पताल बड़सर में अल्ट्रासाउंड की सुविधा सप्ताह में केवल एक ही बार मिलती है। अगर किसी ने अपना अल्ट्रसाउंड करवाना हो तो उसे शनिवार तक इंतजार करना पड़ता है या फिर बाहर निजी क्षेत्र में महंगे दामों पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। -चत्तर सिंह कौशल, टिप्पर पंचायत प्रधान
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों को निजी अस्पतालों में महंगे दाम पर अल्ट्रसाउंड करवाना पड़ता है। हैरानी की बात है कि यहां पर स्थायी विशेषज्ञ ही तैनात नहीं किया जा रहा है। -राकेश शर्मा, उपप्रधान, पंचायत बड़सर
सिविल अस्पताल बड़सर में भोरंज से विशेषज्ञ आते हैं। दस से अधिक पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले अस्पताल में सप्ताह में एक बार ही अल्ट्रासाउंड किए जाने की व्यवस्था सही नहीं है। सरकार को यहां पर स्थायी विशेषज्ञ तैनात करना चाहिए, ताकि दिक्कतें पेश न आएं। -डॉ. सीमा शर्मा, स्थानीय निवासी
सरकार लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर सरकार के नुमाइंदों तथा जनप्रतिनिधियों को देखना चाहिए कि लोगों को किस प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। सप्ताह में केवल एक दिन अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है। -करतार सिंह, स्थानीय निवासी
अस्पताल में स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है, ऐसे में भोरंज से विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं। आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। -अरविंद टंडन, बीएमओ, बड़सर

राकेश शर्मा उपप्रधान पंचायत बड़सर

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