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Hamirpur (Himachal) News: साेमा देवी ने पंचमेल आटे से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी
Fri, 03 Jul 2026 12:40 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 03 Jul 2026 12:40 AM IST
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हमीरपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने कौशल और मेहनत के बल पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। फरनोहल पंचायत की सोमा देवी ने पंचमेल आटा तैयार कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है।
घर से शुरू किए गए इस छोटे से व्यवसाय ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया है। सोमा देवी ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में लोग विभिन्न अनाजों को मिलाकर पौष्टिक पंचमेल आटा तैयार करते थे, लेकिन बदलती जीवनशैली से यह परंपरा समाप्त होने लगी।
इसी परंपरा को आधुनिक रूप देने के उद्देश्य से उन्होंने पंचमेल आटा तैयार करना शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने परिचितों के लिए सैंपल के तौर पर सीमित मात्रा में आटा बनाया। स्वाद और पौष्टिकता की सराहना मिलने के बाद उन्होंने इसे व्यवसाय का रूप दे दिया।
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उन्होंने बताया कि पंचमेल आटा गेहूं, जौ, चना, मक्का और बाजरा जैसे अनाजों से तैयार किया जाता है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। वर्तमान में वह नियमित रूप से पंचमेल आटा तैयार कर स्थानीय बाजार में उपलब्ध करा रही हैं।
अब इस कार्य से उन्हें हर महीने चार से पांच हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। संवाद
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घर से शुरू किए गए इस छोटे से व्यवसाय ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया है। सोमा देवी ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में लोग विभिन्न अनाजों को मिलाकर पौष्टिक पंचमेल आटा तैयार करते थे, लेकिन बदलती जीवनशैली से यह परंपरा समाप्त होने लगी।
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इसी परंपरा को आधुनिक रूप देने के उद्देश्य से उन्होंने पंचमेल आटा तैयार करना शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने परिचितों के लिए सैंपल के तौर पर सीमित मात्रा में आटा बनाया। स्वाद और पौष्टिकता की सराहना मिलने के बाद उन्होंने इसे व्यवसाय का रूप दे दिया।
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उन्होंने बताया कि पंचमेल आटा गेहूं, जौ, चना, मक्का और बाजरा जैसे अनाजों से तैयार किया जाता है, जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। वर्तमान में वह नियमित रूप से पंचमेल आटा तैयार कर स्थानीय बाजार में उपलब्ध करा रही हैं।
अब इस कार्य से उन्हें हर महीने चार से पांच हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। संवाद