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Hamirpur (Himachal) News: एलएडीसी के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल जारी
Sun, 02 Aug 2026 12:56 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 02 Aug 2026 12:56 AM IST
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हमीरपुर। लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) प्रणाली के विरोध में जिला बार एसोसिएशन हमीरपुर के अधिवक्ताओं ने दूसरे दिन भी न्यायालय परिसर में सांकेतिक हड़ताल जारी रखी।
दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का नेतृत्व जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कौंडल ने किया। उन्होंने बताया कि सोमवार को सीजीआई के साथ प्रस्तावित बैठक के बाद ही हड़ताल को आगे जारी रखने का निर्णय लिया जाएगा।
अधिवक्ताओं ने आम लोगों की सुविधा को देखते हुए आवश्यक मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक न्यायालय में दो-दो अधिवक्ताओं की ड्यूटी भी लगाई है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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अधिवक्ताओं का कहना है कि एलएडीसी व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के मामलों की पैरवी के लिए सीमित संख्या में पूर्णकालिक अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाएगी। इससे कानूनी सहायता से जुड़े मामलों का लाभ कुछ चुनिंदा अधिवक्ताओं तक सीमित हो सकता है और अन्य वकीलों, विशेषकर युवा अधिवक्ताओं, को अवसर कम मिलेंगे।
बार एसोसिएशन ने मांग की है कि एलएडीसी व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए और ऐसी प्रणाली बनाई जाए, जिसमें कानूनी सहायता के मामलों में अधिक से अधिक अधिवक्ताओं को समान अवसर मिल सकें।
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दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल का नेतृत्व जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कौंडल ने किया। उन्होंने बताया कि सोमवार को सीजीआई के साथ प्रस्तावित बैठक के बाद ही हड़ताल को आगे जारी रखने का निर्णय लिया जाएगा।
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अधिवक्ताओं ने आम लोगों की सुविधा को देखते हुए आवश्यक मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक न्यायालय में दो-दो अधिवक्ताओं की ड्यूटी भी लगाई है, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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अधिवक्ताओं का कहना है कि एलएडीसी व्यवस्था के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के मामलों की पैरवी के लिए सीमित संख्या में पूर्णकालिक अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जाएगी। इससे कानूनी सहायता से जुड़े मामलों का लाभ कुछ चुनिंदा अधिवक्ताओं तक सीमित हो सकता है और अन्य वकीलों, विशेषकर युवा अधिवक्ताओं, को अवसर कम मिलेंगे।
बार एसोसिएशन ने मांग की है कि एलएडीसी व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए और ऐसी प्रणाली बनाई जाए, जिसमें कानूनी सहायता के मामलों में अधिक से अधिक अधिवक्ताओं को समान अवसर मिल सकें।