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Hamirpur (Himachal) News: मक्की को फॉल आर्मी वर्म से बचाने के लिए बढ़ाई निगरानी
Thu, 23 Jul 2026 05:37 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 23 Jul 2026 05:37 AM IST
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कुल्लू जिला में मक्की की फसल पर फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप बढ़ने की संभावना को देखते हुए कृषि विभा
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कुल्लू। मक्की की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप बढ़ गया है। इसकी बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए कृषि विभाग ने जिले में निगरानी और नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है।
इस मामले को संवाद न्यूज एजेंसी ने अमर उजाला के माध्यम से 15 जुलाई को सैंज घाटी में मक्की की फसल को लगी बीमारी नामक शीर्षक से प्रकाशित किया है। इसके चलते अब विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
उप कृषि निदेशक डॉ. ऋतु गुप्ता ने बताया कि विभाग द्वारा गठित जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसलों का निरीक्षण कर रही है औ किसानों को समय रहते आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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विभाग की टीम ने खोखन पंचायत क्षेत्र में मक्की के खेतों का निरीक्षण किया, जहां फसल में फॉल आर्मी वर्म का लगभग पांच से 10 प्रतिशत प्रकोप पाया गया।
निरीक्षण दल में जिला कृषि अधिकारी सुशील कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा के कीट वैज्ञानिक डॉ. रमेश लाल, कृषि विकास अधिकारी राकेश कुमार और कृषि विकास अधिकारी भुंतर मधुसूदन शर्मा शामिल रहे।
उनका कहना है कि इस कीट की प्रारंभिक पहचान पत्तियों पर सुई जैसे छोटे-छोटे छेद और बाद में बनने वाले बड़े अनियमित सुराखों से होती है। इसकी सूंडियां पत्तियों की मध्यकली के भीतर रहकर तेजी से फसल को नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि यदि मक्की की पत्तियों पर छेद, मध्यकली में कीट अथवा कीट का मल दिखाई दे तो तुरंत कृषि विभाग या निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें, ताकि समय रहते नियंत्रण कर फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
छिड़काव करने की सलाह दी
टीम ने किसानों को सलाह दी कि यदि खेत में कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो नीम आधारित कीटनाशक का प्रयोग करें। अधिक प्रकोप होने पर एमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा क्लोरांट्रानिलिप्रोल 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव किया जा सकता है। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान पांच लीटर अग्निअस्त्र या ब्रह्मास्त्र को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।
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इस मामले को संवाद न्यूज एजेंसी ने अमर उजाला के माध्यम से 15 जुलाई को सैंज घाटी में मक्की की फसल को लगी बीमारी नामक शीर्षक से प्रकाशित किया है। इसके चलते अब विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
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उप कृषि निदेशक डॉ. ऋतु गुप्ता ने बताया कि विभाग द्वारा गठित जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसलों का निरीक्षण कर रही है औ किसानों को समय रहते आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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विभाग की टीम ने खोखन पंचायत क्षेत्र में मक्की के खेतों का निरीक्षण किया, जहां फसल में फॉल आर्मी वर्म का लगभग पांच से 10 प्रतिशत प्रकोप पाया गया।
निरीक्षण दल में जिला कृषि अधिकारी सुशील कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा के कीट वैज्ञानिक डॉ. रमेश लाल, कृषि विकास अधिकारी राकेश कुमार और कृषि विकास अधिकारी भुंतर मधुसूदन शर्मा शामिल रहे।
उनका कहना है कि इस कीट की प्रारंभिक पहचान पत्तियों पर सुई जैसे छोटे-छोटे छेद और बाद में बनने वाले बड़े अनियमित सुराखों से होती है। इसकी सूंडियां पत्तियों की मध्यकली के भीतर रहकर तेजी से फसल को नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि यदि मक्की की पत्तियों पर छेद, मध्यकली में कीट अथवा कीट का मल दिखाई दे तो तुरंत कृषि विभाग या निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें, ताकि समय रहते नियंत्रण कर फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
छिड़काव करने की सलाह दी
टीम ने किसानों को सलाह दी कि यदि खेत में कीट का प्रकोप 10 प्रतिशत से कम हो तो नीम आधारित कीटनाशक का प्रयोग करें। अधिक प्रकोप होने पर एमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा क्लोरांट्रानिलिप्रोल 0.4 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव किया जा सकता है। प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसान पांच लीटर अग्निअस्त्र या ब्रह्मास्त्र को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।