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Hamirpur (Himachal) News: स्वप्नली ने स्वरोजगार की राह अपना पूरे किए सपने
Thu, 23 Jul 2026 01:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 23 Jul 2026 01:17 AM IST
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बैग निर्माण करते हुए ग्राम पंचायत सरेरी के गांव पपलाह की स्वप्नली शर्मा। संवाद
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हमीरपुर। वर्तमान समय में जब बड़ी संख्या में युवा पढ़-लिखकर नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, वहीं ग्राम पंचायत सरेरी के गांव पपलाह ब्राह्मणा की स्वप्नली शर्मा ने स्वरोजगार अपनाकर अपने सपने पूरे किए और अलग पहचान बनाई है।
स्वप्नली पहले महाराष्ट्र की एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं, लेकिन उनके मन में खुद का काम शुरू करने और अपनी पहचान बनाने का सपना था। नौकरी छोड़कर हिमाचल लौटने के बाद उन्होंने स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशनी शुरू कीं।
इसी दौरान वर्ष 2018 में उन्हें आरसेटी हमीरपुर की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मिली। इसके बाद वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बैग निर्माण का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने बैग बनाने का कार्य शुरू किया और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर महिला के रूप में पहचान बनाई।
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स्वप्नली बताती हैं कि वह हर माह 10 से 12 हजार रुपये की आय अर्जित कर पति के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनका कहना है कि महिलाएं अब केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं। यदि वे दृढ़ निश्चय करें तो अपनी सफलता की कहानी खुद लिख सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नौकरी में भले ही वेतन अधिक हो, लेकिन परिवार से दूर रहना कठिन होता है। उनके पति निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, ऐसे में दोनों का मिलकर परिवार का खर्च चलाना जरूरी है। अब वह घर पर रहकर भी अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
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स्वप्नली पहले महाराष्ट्र की एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं, लेकिन उनके मन में खुद का काम शुरू करने और अपनी पहचान बनाने का सपना था। नौकरी छोड़कर हिमाचल लौटने के बाद उन्होंने स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशनी शुरू कीं।
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इसी दौरान वर्ष 2018 में उन्हें आरसेटी हमीरपुर की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी मिली। इसके बाद वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बैग निर्माण का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने बैग बनाने का कार्य शुरू किया और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर महिला के रूप में पहचान बनाई।
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स्वप्नली बताती हैं कि वह हर माह 10 से 12 हजार रुपये की आय अर्जित कर पति के साथ मिलकर परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं। उनका कहना है कि महिलाएं अब केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं। यदि वे दृढ़ निश्चय करें तो अपनी सफलता की कहानी खुद लिख सकती हैं।
उन्होंने कहा कि नौकरी में भले ही वेतन अधिक हो, लेकिन परिवार से दूर रहना कठिन होता है। उनके पति निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, ऐसे में दोनों का मिलकर परिवार का खर्च चलाना जरूरी है। अब वह घर पर रहकर भी अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।