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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   High Court set aside the district court's decision to cancel the gift deed for not taking care of the decease

Shimla: वृद्धावस्था में देखभाल नहीं करने पर रद्द हो सकती है गिफ्ट डीड, जिला अदालत का फैसला निरस्त

Mon, 03 Aug 2026 08:15 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 03 Aug 2026 08:15 PM IST
सार

न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कहा कि केवल मनी ऑर्डर के माध्यम से पैसे भेज देना वृद्ध व्यक्तियों की सेवा और देखभाल का विकल्प नहीं माना जा सकता। 

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High Court set aside the district court's decision to cancel the gift deed for not taking care of the decease
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि गिफ्ट डीड (दान-पत्र) इस शर्त पर की गई हो कि दान प्राप्त करने वाला व्यक्ति दाता और उसकी पत्नी की वृद्धावस्था में देखभाल व रखरखाव करेगा, तो इस शर्त का उल्लंघन होने पर गिफ्ट डीड रद्द की जा सकती है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कहा कि केवल मनी ऑर्डर के माध्यम से पैसे भेज देना वृद्ध व्यक्तियों की सेवा और देखभाल का विकल्प नहीं माना जा सकता। बुजुर्गों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ शारीरिक देखभाल, सम्मान और व्यक्तिगत ध्यान की भी आवश्यकता होती है। इसलिए वादी की ओर से मनी ऑर्डर लौटाना उसकी गलती नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने जिला अदालत शिमला के फैसले को निरस्त करते हुए ट्रायल कोर्ट ठियोग के 12 नवंबर 2002 के निर्णय को बहाल कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने गिफ्ट डीड रद्द करते हुए संबंधित भूमि का अधिकार दाता के कानूनी प्रतिनिधियों को लौटाने का आदेश दिया था।

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यह है मामला
यह मामला जिला शिमला के ठियोग क्षेत्र का है। शान्तू ने 21 मार्च 1997 को अपनी आधी भूमि कांशी राम को नाम इस शर्त पर दान की थी कि वह उनकी और उनकी पत्नी की वृद्धावस्था में सेवा एवं देखभाल करेगा। दान-पत्र में स्पष्ट लिखा था कि यदि इस शर्त का पालन नहीं किया गया तो दान निरस्त माना जाएगा। वादी ने आरोप लगाया कि गिफ्ट डीड के निष्पादन के बाद प्रतिवादी और उसके परिजनों ने उनकी और उनकी पत्नी की देखभाल बंद कर दी। उन्हें प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस पर वादी ने सिविल सूट दायर कर दान-पत्र रद्द करने की मांग की।

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प्रतिवादी ने दी यह दलील
प्रतिवादी कांशी राम ने बचाव में कहा कि उसने वादी को मनी ऑर्डर के जरिये पैसे भेजे थे, जिन्हें वादी ने स्वीकार नहीं किया। जिला न्यायाधीश ने यह मानकर ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया था कि भविष्य की सेवा दान का मुख्य आधार नहीं हो सकती। हाईकोर्ट ने कहा कि जब दान-पत्र में देखभाल की स्पष्ट शर्त हो और उसके उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य हों, तो गिफ्ट डीड को निरस्त करना पूरी तरह न्यायसंगत और विधिसम्मत है।

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