हिमाचल: यूजी के 18 विद्यार्थियों ने परीक्षा में की थी नकल, एचपीयू ने रद्द किए पेपर
एचपीयू ने नकल और परीक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 विद्यार्थियों की संबंधित विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) की यूजी परीक्षाओं में सामने आया है कि 18 विद्यार्थियों ने परीक्षा में नकल की थी। एचपीयू ने नकल और परीक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 विद्यार्थियों की संबंधित विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। जांच में इनकी उत्तर पुस्तिकाओं में नकल करने की पुष्टि हुई है। इसके बाद परीक्षा अनुशासन समिति ने 6 और 7 जुलाई को हुई सुनवाई के आधार पर अब 20 मामलों में फैसला सुनाया है। इनमें दो मामलों में आरोप सिद्ध नहीं होने पर अभ्यर्थियों को दोषमुक्त कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के पास इस परीक्षा सत्र में यूएमसी के कुल 51 मामले पहुंचे थे। पेपर रद्द होने का सीधा असर संबंधित विद्यार्थियों के परिणाम पर पड़ेगा।
विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार उन्हें उस विषय में अनुत्तीर्ण (फेल) माना जाएगा। डिग्री पूरी करने के लिए अब उन्हें विश्वविद्यालय की पूरक परीक्षा और निर्धारित क्लीयरेंस प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संबंधित विषय दोबारा उत्तीर्ण करने के बाद ही परिणाम नियमित माना जाएगा। सबसे अधिक कार्रवाई राजकीय महाविद्यालय पांवटा साहिब के विद्यार्थियों पर हुई है। यहां हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, भूगोल, रसायन विज्ञान और बीसीए के प्रश्नपत्र रद्द किए गए हैं। राजकीय महाविद्यालय चंबा में शारीरिक शिक्षा का प्रश्नपत्र निरस्त किया गया है। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय डंगार के दो विद्यार्थियों के शास्त्री-ई-6 के प्रश्नपत्र रद्द किए गए हैं।
एमसीएम डीएवी कॉलेज, कांगड़ा में इतिहास का प्रश्नपत्र निरस्त हुआ है। राजकीय महाविद्यालय ऊना के एक विद्यार्थी का गणित का प्रश्नपत्र रद्द किया गया है, जबकि एसवीजीसी, घुमारवीं के एक विद्यार्थी का एमकॉम का प्रश्नपत्र निरस्त किया गया है। परीक्षा नियंत्रक श्याम लाल कौशल ने बताया कि समिति ने सुनवाई के दौरान प्रत्येक मामले में परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेज, जब्त सामग्री और संबंधित अभ्यर्थियों के स्पष्टीकरण का परीक्षण किया। जांच पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अध्यादेश, 1973 के यूएमसी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई। जिन मामलों में परीक्षा नियमों के उल्लंघन के आरोप सही पाए गए, उनमें संबंधित विषय का मार्च-2026 का प्रश्नपत्र निरस्त कर दिया गया।
दो मामलों में मिली राहत
सुनवाई के दौरान समिति ने सभी मामलों में एक जैसा फैसला नहीं दिया। राजकीय महाविद्यालय अंब और राजकीय महाविद्यालय पांवटा साहिब के एक-एक मामले में आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। दोनों अभ्यर्थियों को दोषमुक्त कर दिया गया। इससे स्पष्ट है कि समिति ने हर मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग निर्णय लिया।
31 मामलों पर फैसला अभी बाकी
यूजी परीक्षाओं में इस बार यूएमसी के 51 मामले सामने आए थे। इनमें से अभी 20 मामलों का निपटारा हुआ है, जबकि 31 पर फैसला आना बाकी है। इनकी सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी है। अब परीक्षा अनुशासन समिति की संस्तुति के आधार पर विश्वविद्यालय चरणबद्ध तरीके से अगले आदेश जारी करेगा।