Himachal Rain: भारी बारिश और भूस्खलन से 120 सड़कें ठप, कांगड़ा में मकान ढहा, दाता-पोती घायल
शिमला में झमाझम बारिश हुई, जबकि किन्नौर के निगुलसरी में पहाड़ी से भारी मलबा और चट्टानें गिरने के कारण राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 करीब 11 घंटे तक अवरुद्ध रहा। भारी बारिश और भूस्खलन से 120 सड़कें बंद हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गुरुवार को हुई बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया। राजधानी शिमला में झमाझम बारिश हुई, जबकि किन्नौर के निगुलसरी में पहाड़ी से भारी मलबा और चट्टानें गिरने के कारण राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 करीब 11 घंटे तक अवरुद्ध रहा। भारी बारिश और भूस्खलन से 120 सड़कें बंद हैं। सिरमौर जिले में 26 सड़कें, चंबा में पांच, कांगड़ा पांच, कुल्लू में 31, मंडी में 38, शिमला में 13 और ऊना में दो सड़कें बंद हैं। सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना यातायात सामान्य है। प्रदेश में मानसून सीजन में अभी तक 797 करोड़ रुपये का संपत्ति का नुकसान हो चुका है। प्रदेश में बारिश, बाढ़, भूस्खलन और हादसों में 142 लोगों की जान जा चुकी है। अब 142 कच्चे और 90 पक्के मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरने से सड़क किनारे खड़ी दो कारें क्षतिग्रस्त
किन्नौर के निगुलसरी में सुबह करीब साढ़े छह बजे पहाड़ी से भारी पत्थर और मलबा एनएच-5 पर आ गिरा। मार्ग बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सीमा सड़क संगठन और एनएचएआई की टीमों ने सुबह से ही बहाली कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण सड़क खोलने में काफी समय लगा। शाम करीब साढ़े पांच बजे यातायात बहाल किया जा सका। शिमला-नेरवा मुख्य मार्ग पर वीरवार को पहाड़ी से पत्थर और मलबा गिरने से सड़क किनारे खड़ी दो कारें क्षतिग्रस्त हो गईं। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय वाहनों में कोई मौजूद नहीं था। कांगड़ा जिले के फतेहपुर उपमंडल की सुनहारा पंचायत के बडियाली गांव में बुधवार देर रात भारी बारिश के चलते एक कच्चा मकान ढह गया। हादसे में करीब 80 वर्षीय रमेश और उनकी पोती घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
भूस्खलन की चपेट में आने से तीन भेड़ों की मौत
वहीं चंबा जिले में भूस्खलन की चपेट में आने से तीन भेड़ों की मौत हो गई, जबकि पहाड़ी से पत्थर गिरने से एक गाय की भी जान चली गई। बारिश और भूस्खलन के कारण सिरमौ जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा। जिले में 28 सड़कें तथा 33 पेयजल एवं सिंचाई योजनाएं बंद हैं। ददाहू-संगड़ाह मार्ग पर वालिया माइंस के पास मलबा गिरने से यातायात करीब तीन घंटे प्रभावित रहा। नाहन-ददाहू मार्ग पर बडोलिया के समीप ट्रक पलटने से भी दो घंटे तक आवाजाही बाधित रही। नाहन-कुमारहट्टी, कालाअंब-देहरादून और पांवटा-शिलाई-लालढांक राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी कई स्थानों पर पत्थर और मलबा आने से यातायात प्रभावित हुआ। जटौन डैम और उत्तराखंड के कुछ बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद पांवटा साहिब स्थित यमुनाघाट पर जलस्तर बढ़ गया। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलधाराओं के किनारे न जाने की अपील की है। उधर, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी के कई क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई। हालांकि चंबा, हमीरपुर और ऊना के अधिकांश हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहा। इन जिलों में उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान किया।
बिलासपुर और कांगड़ा में बारिश का येलो अलर्ट
बिलासपुर और कांगड़ा जिला के कुछ क्षेत्रों में शुक्रवार को बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। 12 अगस्त तक पूरे प्रदेश में मौसम खराब बना रहने का पूर्वानुमान है। वहीं मनाली में 65, धर्मशाला 64, नाहन 63 शिमला 34, मंडी 19 व सोलन में 11 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।