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Wildlife: किन्नौर के रूपी भावा अभयारण्य में फिर दिखा हिमालयन सीरो, छोटा कम्बा में पहली बार कैमरे में कैद
Thu, 06 Aug 2026 04:21 PM IST
Ankesh Dogra
विश्वास भारद्वाज, शिमला।
विश्वास भारद्वाज, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 06 Aug 2026 04:21 PM IST
सार
किन्नौर के रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य में दुर्लभ हिमालयन सीरो एक बार फिर कैमरे में कैद हुआ है। वन विभाग ने छोटा कम्बा बीट क्षेत्र में इसकी पहली पुष्ट रिकॉर्डिंग दर्ज की है। अधिकारियों का कहना है कि यह क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का संकेत है। अब कैमरा ट्रैप की मदद से इस प्रजाति की निगरानी और अध्ययन को और मजबूत किया जाएगा।
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हिमालयन सीरो
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
किन्नौर जिले के रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अभयारण्य के छोटा कम्बा बीट क्षेत्र में दुर्लभ हिमालयन सीरो पहली बार कैमरे में कैद हुआ है। वन विभाग की नियमित गश्त के दौरान वन रक्षक सुरेंद्र ढाली ने इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीर और वीडियो रिकॉर्ड किया। विभाग का कहना है कि छोटा कम्बा क्षेत्र में यह हिमालयन सीरो की पहली पुष्ट कैमरा रिकॉर्डिंग है।
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घने जंगलों और खड़ी पहाड़ी ढलानों में रहता है हिमालयन सीरो
हिमालयन सीरो बेहद शर्मीला और एकांतप्रिय वन्यजीव माना जाता है। यह सामान्यतः घने जंगलों और खड़ी पहाड़ी ढलानों में रहता है, इसलिए इसका खुले में दिखाई देना काफी दुर्लभ होता है। वन विभाग का मानना है कि इस रिकॉर्डिंग से रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य में समृद्ध जैव विविधता की एक बार फिर पुष्टि हुई है।
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पहले भी मिल चुके हैं प्रमाण
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य में हिमालयन सीरो की मौजूदगी वर्ष 2019 में दर्ज की गई थी। इसके बाद वर्ष 2021-22 में रक्छम-चितकुल वन्यजीव अभयारण्य के रक्छम बीट क्षेत्र में भी इस दुर्लभ प्रजाति की रिकॉर्डिंग हुई थी। अब छोटा कम्बा क्षेत्र से मिली नई रिकॉर्डिंग को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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अब बढ़ेगी कैमरा ट्रैप निगरानी
उप अरण्यपाल (आईएफएस) अशोक कुमार नेगी ने कहा कि हिमालयन सीरो का दोबारा दिखाई देना केवल एक दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी का संकेत नहीं, बल्कि रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का भी प्रमाण है। उन्होंने बताया कि अब कैमरा ट्रैप और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से इस प्रजाति की संख्या और इसके वितरण का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने वन विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह रिकॉर्डिंग वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती देगी।
उप अरण्यपाल (आईएफएस) अशोक कुमार नेगी ने कहा कि हिमालयन सीरो का दोबारा दिखाई देना केवल एक दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी का संकेत नहीं, बल्कि रूपी भावा वन्यजीव अभयारण्य के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का भी प्रमाण है। उन्होंने बताया कि अब कैमरा ट्रैप और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से इस प्रजाति की संख्या और इसके वितरण का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने वन विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह रिकॉर्डिंग वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती देगी।