हिमाचल जिला परिषद चुनाव: आठ जिलों में भाजपा परचम बरकरार, भाजपा चंबा, कुल्लू में पिछड़ी कांग्रेस
जिला परिषद चुनाव के नतीजों में जहां भाजपा ने आठ जिलों में भगवा परचम बरकरार रखा। वहीं चंबा जिला परिषद को कांग्रेस ने भाजपा से झटक लिया।
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हिमाचल प्रदेश के जिला परिषद चुनाव के नतीजों में जहां भाजपा ने आठ जिलों में भगवा परचम बरकरार रखा। वहीं चंबा जिला परिषद को कांग्रेस ने भाजपा से झटक लिया। दूसरी ओर, भाजपा ने कुल्लू में कांग्रेस के वर्चस्व वाली जिला परिषद पर अपना कब्जा जमाया है। लाहौल-स्पीति में कांग्रेस आगे है। चंबा में कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत है। दो बड़ी जिला परिषदों कांगड़ा और शिमला में निर्दलियों के हाथ सत्ता की चाबी है। पिछली बार नौ जिलों में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला था।
लाहौल-स्पीति जिला परिषद पिछली बार कांग्रेस के पास थी। इस बार भी कांग्रेस का वर्चस्व यहां बरकरार रहा है। कुल्लू में पिछली बार कांग्रेस की जिला परिषद थी, जिसे भाजपा ने इस बार झटक लिया है। पिछले जिला परिषद चुनाव की बात करें तो ऊना, मंडी, सिरमौर, बिलासपुर, सोलन, कांगड़ा, चंबा, किन्नौर और हमीरपुर में भाजपा ने अपने जिप अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाए थे। उस समय प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। इस बार के चुनाव में विपक्ष में बैठी भाजपा ने अपने समर्थित उम्मीदवार घोषित कर जिला परिषद चुनाव लड़े, जबकि सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सीधा समर्थन नहीं दिया पर बड़ी संख्या में कांग्रेस से जुड़े उम्मीदवार मैदान में उतरे।
इस बार ऊना, मंडी, सिरमौर, कुल्लू, बिलासपुर, सोलन, किन्नौर और हमीरपुर में भाजपा समर्थित उम्मीदवार ज्यादा जीते हैं। ऐसे में इन आठ जिलों में भाजपा और दो अन्य जिलों में कांग्रेस के जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनने का रास्ता साफ माना जा रहा है। कांगड़ा में भले ही भाजपा की बढ़त हो, मगर यहां जिला परिषदों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष चुनने के लिए निर्दलीय अहम भूमिका निभाएंगे। यही स्थिति शिमला में भी हाेगी। कांगड़ा और शिमला जिलों में अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस व भाजपा को एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा।
पंचायतीराज चुनावों में जनता ने भाजपा को दो-तिहाई से अधिक बहुमत दिया है। जिला परिषद के चुनावों में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल की। सभी 12 जिला परिषदों में बढ़त हासिल की। कुल 250 वार्डों में भाजपा के समर्थित 150 प्रत्याशी जीते हैं। कांग्रेस पार्टी को केवल 52 सीटें ही जीत पाई। जनमानस का गुस्सा वोट के रूप में फूटा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के गृह विधानसभा क्षेत्र रेणुकाजी की चारों सीटें भाजपा ने जीती है। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र की जिला परिषद सीट भी भाजपा ने जीती है और कांग्रेस सरकार में पदों पर विराजमान सभी मंत्रियों के जिला परिषद क्षेत्रों में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। - डॉ. राजीव बिंदल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष
भाजपा ने अपने समर्थित उम्मीदवारों को चुनाव में उतारा। कांग्रेस ने किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया। कांग्रेस में कई सीटों पर दो से तीन लोग खड़े हो गए। इसका भाजपा को लाभ मिला है। जो निर्दलीय जीतकर आए हैं, वे सभी कांग्रेस के ही हैं। पंचायत समितियों और पंचायतों में कांग्रेस को बहुमत मिला है। जहां तक जिला परिषदों के सदस्यों के चुनाव की बात है। कांग्रेस समीक्षा करेगी कि कहां-कहां किन कारणों से चूक हुई है। - नरेश चौहान, प्रधान सलाहकार मीडिया, मुख्यमंत्री व कांग्र्रेस के वरिष्ठ नेता
कांग्रेस के दिग्गजों के गृह जिलों में दिए भाजपा ने झटके
जिला परिषद के नतीजों में कांग्रेस के कई दिग्गज अपने हलके के वार्ड भी नहीं बचा पाए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर में भाजपा समर्थितों ने 15, कांग्रेस से जुड़े उम्मीदवारों में से तीन और एक अन्य ने जीत हासिल की। यहां धूमल परिवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का प्रभाव भी भाजपा की बढ़त का एक कारण हो सकता है। मंडी जिला में भाजपा समर्थितों ने 25, कांग्रेस ने 4 और अन्य ने 7 सीटें जीती हैं। इससे नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की प्रतिष्ठा बढ़ी है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के जिला ऊना के 17 वार्डों में से भाजपा समर्थित 11, कांग्रेस से जुड़े उम्मीदवार पांच और अन्य एक सीट पर जीते। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह के जिला शिमला में भी भाजपा समर्थित 11, कांग्रेस से जुड़े 10 और अन्य चार विजयी हुए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के जिला सिरमौर में भाजपा समर्थित 11 वार्डों और कांग्रेस से जुड़े उम्मीदवार 2 सीटों पर ही विजयी हुए। यह भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल का जिला है तो इससे उनकी साख बढ़ी है।
बिलासपुर में कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई
बिलासपुर जिला में जिला परिषद के 14 वार्डों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 में से 9 वार्डों पर जीत दर्ज की, जबकि पांच वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया। दूसरी ओर कांग्रेस से जुड़े उम्मीदवारों का पूरी तरह सफाया हो गया। यहां सत्ताधारी दल को एक भी सीट नहीं आई है। उधर, जिला परिषद बरमाणा वार्ड की मतगणना को लेकर मतगणना केंद्र के बाहर गहमागहमी का माहौल रहा। भाजपा समर्थित अशोक कुमार शर्मा के समर्थकों ने रिकाउंटिंग को लेकर आपत्ति जताई, हालांकि रिकाउंटिंग के बाद भी अशोक शर्मा ही विजेता रहे। बरमाणा की मतगणना सुबह शुरू हुई। इसमें अशोक शर्मा को अधिक मत मिले। समर्थकों का कहना था कि मतगणना के बाद उन्हें विजेता घोषित किया गया। इसके बाद 30 से 40 मिनट बाद अशोक शर्मा को वापस बुलाया गया और कहा गया कि रिकाउंटिंग की जानी है।