HPBOSE: छठी कक्षा से एआई शुरू करने की तैयारी, स्कूल शिक्षा बोर्ड ने निजी कंपनी के साथ की चर्चा
स्कूल शिक्षा बोर्ड अब प्रदेश के स्कूलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षा शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहा है।
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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अब प्रदेश के स्कूलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षा शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहा है। बोर्ड ने छठी कक्षा से ही विद्यार्थियों को एआई की प्रारंभिक जानकारी देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके लिए कंप्यूटर और संचार क्षेत्र से जुड़ी एक निजी कंपनी के साथ प्रारंभिक स्तर पर पाठ्यक्रम को लेकर चर्चा की गई है। बोर्ड की योजना है कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल युग की जरूरतों के अनुरूप शुरुआती स्तर से ही एआई की समझ दी जाए। इसके लिए तैयार किए जाने वाले पाठ्यक्रम में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक जानकारी को भी शामिल किया जा सकता है।
शिक्षा बोर्ड शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की राय भी लेगा
शिक्षा बोर्ड इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की राय भी लेगा। इसके तहत कॉलेजों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा स्कूलों के अध्यापकों से सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थियों की आयु और शैक्षणिक स्तर के अनुसार उपयुक्त पाठ्यक्रम तैयार किया जा सके। बोर्ड की ओर से सभी सुझावों और चर्चाओं के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजी जाएगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही स्कूलों में एआई शिक्षा लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शिक्षा बोर्ड की इस पाठ्यक्रम को वैकल्पिक विषय के तौर शुरू करने की योजना है, ताकि अगर कोई विद्यार्थी एआई पढ़ना चाहता है तो उसे इसकी सुविधा प्रदेश के स्कूलों में ही उपलब्ध हो सके।
स्कूल शिक्षा बोर्ड छठी कक्षा से एआई की पढ़ाई शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए कंप्यूटर क्षेत्र की एक निजी कंपनी के साथ पाठ्यक्रम को लेकर कार्यशाला हुई है। पाठ्यक्रम के लिए कालेज, केंद्रीय विश्वविद्यालय और स्कूलों के अध्यापकों की भी राय ली जा रही है। इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजी जाएगी। सरकार की अनुमति के बाद ही एआई को शुरू करने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। - डॉ. मेजर विशाल शर्मा, सचिव, स्कूल शिक्षा बोर्ड, धर्मशाला।