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Kangra News: एक साल से रोजगार का इंतजार कर रहे 166 कामगार
Fri, 14 Aug 2026 02:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 14 Aug 2026 02:04 AM IST
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फतेहपुर (कांगड़ा)। किसी ने जिंदगी के 21 साल सरकारी परियोजनाओं को दिए तो किसी ने परिवार की जिम्मेदारियों के बीच वर्षों तक पूरी निष्ठा से सेवाएं दीं। उम्मीद थी कि लंबे अनुभव के बाद रोजगार का सहारा बना रहेगा लेकिन करीब एक साल पहले 166 कर्मचारियों को काम से हटा दिया गया। अब ये कर्मचारी दोबारा रोजगार मिलने की आस लगाए बैठे हैं।
हिमाचल प्रदेश वन विभाग के तहत ''मिड हिमालय प्रोजेक्ट'' और इसके बाद ''ईको सिस्टम क्लाइमेट प्रूफिंग प्रोजेक्ट'' में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दोबारा रोजगार देने का आश्वासन मिला था। इस उम्र में अब नया काम तलाशना मुश्किल हो गया है। उन्होंने समस्या मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
महिला कर्मचारियों ने साझा की अपनी पीड़ा
रोजगार से वंचित महिला कर्मचारियों सुदेश कुमार (निवासी गारन), रंजू बाला (निवासी देहरी), सुनीता देवी (निवासी तलाड़ा), रमनजोत कौर (निवासी बास बजीरा), चंचला देवी (निवासी गनोह), वंदना देवी (निवासी भुगनाड़), निशा देवी (निवासी धनेटी), किरण रेखा (निवासी राजा का तालाब), सुनीता कुमारी (निवासी बड़ी बतराहण) और सुदेश कुमारी (निवासी दरकाटी) सहित अन्य ने आपबीती सुनाई।
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भारतीय मजदूर संघ से मांगा सहयोग, उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रभावित कर्मचारियों ने भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा से फतेहपुर में मुलाकात कर समस्या रखी और सहयोग की गुहार लगाई। मदन राणा ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने 21 साल परियोजनाओं को दिए, उन्हें इस उम्र में घर बैठाना अनुचित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन कर्मचारियों को तुरंत दोबारा रोजगार प्रदान करने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश वन विभाग के तहत ''मिड हिमालय प्रोजेक्ट'' और इसके बाद ''ईको सिस्टम क्लाइमेट प्रूफिंग प्रोजेक्ट'' में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दोबारा रोजगार देने का आश्वासन मिला था। इस उम्र में अब नया काम तलाशना मुश्किल हो गया है। उन्होंने समस्या मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
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महिला कर्मचारियों ने साझा की अपनी पीड़ा
रोजगार से वंचित महिला कर्मचारियों सुदेश कुमार (निवासी गारन), रंजू बाला (निवासी देहरी), सुनीता देवी (निवासी तलाड़ा), रमनजोत कौर (निवासी बास बजीरा), चंचला देवी (निवासी गनोह), वंदना देवी (निवासी भुगनाड़), निशा देवी (निवासी धनेटी), किरण रेखा (निवासी राजा का तालाब), सुनीता कुमारी (निवासी बड़ी बतराहण) और सुदेश कुमारी (निवासी दरकाटी) सहित अन्य ने आपबीती सुनाई।
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भारतीय मजदूर संघ से मांगा सहयोग, उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रभावित कर्मचारियों ने भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा से फतेहपुर में मुलाकात कर समस्या रखी और सहयोग की गुहार लगाई। मदन राणा ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने 21 साल परियोजनाओं को दिए, उन्हें इस उम्र में घर बैठाना अनुचित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन कर्मचारियों को तुरंत दोबारा रोजगार प्रदान करने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।