{"_id":"69b70feaa15c89e0170bff06","slug":"a-memorial-will-be-built-in-memory-of-bassis-martyr-dilbag-singh-kangra-news-c-95-1-kng1024-224462-2026-03-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kangra News: बस्सी के बलिदानी दिलबाग सिंह की याद में बनेगा स्मारक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kangra News: बस्सी के बलिदानी दिलबाग सिंह की याद में बनेगा स्मारक
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Mon, 16 Mar 2026 10:08 AM IST
विज्ञापन
शहीद दिलबाग सिंह सपेहियाकी तस्वीर के साथ वीरनारी राजकुमारी। जागरूक पाठक
विज्ञापन
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले देहरा उपमंडल के गांव बस्सी के वीर सपूत बलिदानी दिलबाग सिंह सपेहिया की स्मृति में अब उनके पैतृक गांव में शहीद स्मारक बनाया जाएगा। वर्षों से इस मांग को लेकर प्रयास कर रहे परिवार को आखिरकार सफलता मिल गई है। सांसद अनुराग ठाकुर ने स्मारक निर्माण के लिए दो लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है।
बलिदानी के सबसे छोटे पुत्र सतीश सपेहिया ने बताया कि उनके पिता दिलबाग सिंह वर्ष 1968 में भारतीय सेना की 16 डोगरा रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। करीब तीन दशक तक देश सेवा करने के बाद 2 फरवरी 1995 को जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर के प्लांवाला क्षेत्र में भारतीय सेना के ऑपरेशन रक्षक के दौरान वह मातृभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए थे।
उस दिन आतंकवादियों से मुकाबले के बाद वापस आ रहे सैनिकों से भरे सैन्य वाहन को उग्रवादियों ने बारूदी सुरंग से उड़ा दिया था, जिसमें दिलबाग सिंह ने 47 वर्ष की आयु में वीरगति प्राप्त की।
शहादत के समय परिवार पर दुखों का पहाड़ तब और टूट पड़ा, जब उनके बड़े पुत्र अवतार सिंह भी सेना में तैनात थे। पिता की शहादत के महज पांच महीने बाद 1 जुलाई 1995 को अखनूर सेक्टर के प्लांवाला क्षेत्र में ही आतंकवादियों ने उनके सैन्य वाहन को बारूदी सुरंग से उड़ा दिया। इस हमले में अवतार सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई, जबकि एक बाजू भी गंवानी पड़ी।
बलिदानी दिलबाग सिंह के चार पुत्र और एक पुत्री है। परिवार लंबे समय से गांव में शहीद स्मारक बनाने की मांग कर रहा था। सतीश सपेहिया ने बताया कि उन्होंने कई बार एसडीएम और डीसी को ज्ञापन दिए, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। अंततः उन्होंने 30 जनवरी को जसवां-परागपुर के विधायक एवं पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर से यह मांग रखी। इसके बाद सांसद अनुराग ठाकुर ने डेढ़ महीने के भीतर ही स्मारक निर्माण के लिए दो लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी।
राशि मिलने के बाद शहीद का परिवार भावुक भी है और गर्व से भरा भी। सतीश सपेहिया ने सांसद अनुराग ठाकुर और विधायक बिक्रम ठाकुर का आभार जताते हुए कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को बलिदानी दिलबाग सिंह के साहस, त्याग और देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।
Trending Videos
बलिदानी के सबसे छोटे पुत्र सतीश सपेहिया ने बताया कि उनके पिता दिलबाग सिंह वर्ष 1968 में भारतीय सेना की 16 डोगरा रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। करीब तीन दशक तक देश सेवा करने के बाद 2 फरवरी 1995 को जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर के प्लांवाला क्षेत्र में भारतीय सेना के ऑपरेशन रक्षक के दौरान वह मातृभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उस दिन आतंकवादियों से मुकाबले के बाद वापस आ रहे सैनिकों से भरे सैन्य वाहन को उग्रवादियों ने बारूदी सुरंग से उड़ा दिया था, जिसमें दिलबाग सिंह ने 47 वर्ष की आयु में वीरगति प्राप्त की।
शहादत के समय परिवार पर दुखों का पहाड़ तब और टूट पड़ा, जब उनके बड़े पुत्र अवतार सिंह भी सेना में तैनात थे। पिता की शहादत के महज पांच महीने बाद 1 जुलाई 1995 को अखनूर सेक्टर के प्लांवाला क्षेत्र में ही आतंकवादियों ने उनके सैन्य वाहन को बारूदी सुरंग से उड़ा दिया। इस हमले में अवतार सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई, जबकि एक बाजू भी गंवानी पड़ी।
बलिदानी दिलबाग सिंह के चार पुत्र और एक पुत्री है। परिवार लंबे समय से गांव में शहीद स्मारक बनाने की मांग कर रहा था। सतीश सपेहिया ने बताया कि उन्होंने कई बार एसडीएम और डीसी को ज्ञापन दिए, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। अंततः उन्होंने 30 जनवरी को जसवां-परागपुर के विधायक एवं पूर्व मंत्री बिक्रम ठाकुर से यह मांग रखी। इसके बाद सांसद अनुराग ठाकुर ने डेढ़ महीने के भीतर ही स्मारक निर्माण के लिए दो लाख रुपये की पहली किस्त जारी कर दी।
राशि मिलने के बाद शहीद का परिवार भावुक भी है और गर्व से भरा भी। सतीश सपेहिया ने सांसद अनुराग ठाकुर और विधायक बिक्रम ठाकुर का आभार जताते हुए कहा कि यह स्मारक आने वाली पीढ़ियों को बलिदानी दिलबाग सिंह के साहस, त्याग और देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।