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पहाड़ों में अंधाधुंध कटान आपदा का बड़ा कारण : प्रो. बाल कृष्ण शिवराम
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 18 Mar 2026 07:09 AM IST
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सड़कों और सुरंगों के निर्माण में हो रहे कटान को बताया आपदा आने की मुख्य बजह
आपदा प्रबंधन में चुनौती विषय पर धर्मशाला में करवाई दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। पहाड़ों का अंधाधुंध कटान आपदाओं का सबसे बड़ा कारण है। सड़कों के निर्माण और सुरंगों के लिए यह कटान हो रहा है। आपदा हिमालयी क्षेत्र की गंभीर समस्या है और इससे निपटने के लिए केवल उपचार नहीं, बल्कि रोकथाम पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है। पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण कार्य, सड़क और सुरंग निर्माण के कारण हो रहे अत्यधिक कटान को आपदाओं का प्रमुख कारण बताया। साथ ही सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।
यह बात हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र मोहली (धर्मशाला) में आपदा प्रबंधन पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन पर मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुए प्रो. बाल कृष्ण शिवराम अधिष्ठाता अध्ययन एचपीयू शिमला ने कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय केंद्र में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यातिथि ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए और परिसर का दौरा कर विकास संभावनाओं पर चर्चा की।
जानकारी के अनुसार एचपीयू के क्षेत्रीय केंद्र मोहली (धर्मशाला) में ‘आपदा प्रबंधन में समसामयिक मुद्दे तथा चुनौतियां’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रो. बाल कृष्ण शिवराम मुख्यातिथि रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में ‘आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण हिमालयी शोध केंद्र के निदेशक प्रो. नैनजीत सिंह नेगी उपस्थित रहे।
इसे अलावा तिब्बत समाज से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लोबसंग येंग्सो ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी के सह-संयोजक डॉ. राजकुमार ने दो दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस दौरान मुख्य वक्ता प्रो. नैनजीत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा की।
निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने विश्वविद्यालय में स्थापित शोध केंद्र के माध्यम से प्रस्तावित शोध योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. लोबसंग येंग्सो ने तिब्बत में घट रही आपदाओं के कारणों को डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से समझाया और तिब्बती समाज की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। इस संगोष्ठी में लगभग 160 विद्यार्थियों सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। पहाड़ों का अंधाधुंध कटान आपदाओं का सबसे बड़ा कारण है। सड़कों के निर्माण और सुरंगों के लिए यह कटान हो रहा है। आपदा हिमालयी क्षेत्र की गंभीर समस्या है और इससे निपटने के लिए केवल उपचार नहीं, बल्कि रोकथाम पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है। पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण कार्य, सड़क और सुरंग निर्माण के कारण हो रहे अत्यधिक कटान को आपदाओं का प्रमुख कारण बताया। साथ ही सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।
यह बात हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र मोहली (धर्मशाला) में आपदा प्रबंधन पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन पर मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुए प्रो. बाल कृष्ण शिवराम अधिष्ठाता अध्ययन एचपीयू शिमला ने कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय केंद्र में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यातिथि ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए और परिसर का दौरा कर विकास संभावनाओं पर चर्चा की।
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जानकारी के अनुसार एचपीयू के क्षेत्रीय केंद्र मोहली (धर्मशाला) में ‘आपदा प्रबंधन में समसामयिक मुद्दे तथा चुनौतियां’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रो. बाल कृष्ण शिवराम मुख्यातिथि रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में ‘आपदा प्रबंधन एवं जोखिम न्यूनीकरण हिमालयी शोध केंद्र के निदेशक प्रो. नैनजीत सिंह नेगी उपस्थित रहे।
इसे अलावा तिब्बत समाज से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लोबसंग येंग्सो ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। संगोष्ठी के सह-संयोजक डॉ. राजकुमार ने दो दिवसीय कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इस दौरान मुख्य वक्ता प्रो. नैनजीत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश में पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा की।
निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने विश्वविद्यालय में स्थापित शोध केंद्र के माध्यम से प्रस्तावित शोध योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, विशिष्ट अतिथि डॉ. लोबसंग येंग्सो ने तिब्बत में घट रही आपदाओं के कारणों को डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से समझाया और तिब्बती समाज की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। इस संगोष्ठी में लगभग 160 विद्यार्थियों सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।