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Kangra News: एयरपोर्ट विस्तारीकरण... एक समान मुआवजे न मिलने पर बिफरे ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 01 Feb 2026 08:53 AM IST
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गगल (कांगड़ा)। कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तारीकरण परियोजना अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी बनती जा रही है। सनौरा गांव के प्रभावितों का आरोप है कि सरकार ने विस्तारीकरण को लेकर जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया है। विशेष रूप से मुआवजे के वितरण में बरती जा रही असमानता ने ग्रामीणों में भारी रोष पैदा कर दिया है।
प्रभावितों का कहना है कि सरकार ने सभी को एक समान और उचित मुआवजा देने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ लोगों को करोड़ों रुपये का मुआवजा मिला है, जबकि उसी क्षेत्र के अन्य लोगों को महज कुछ लाख रुपये थमाकर संतोष करने को कहा जा रहा है।
स्थानीय निवासी इशान शर्मा ने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पूछा कि जितनी रकम उन्हें मिल रही है, क्या उतने में आज के दौर में जमीन खरीदना और नया मकान बनाना संभव है। उधर, सनौरा पंचायत की निवर्तमान प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि विस्तारीकरण और बेघर होने के सदमे से कई लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि सनौरा गांव के कई परिवार ऐसे हैं जो पहले भी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हो चुके हैं और अब उन्हें तीसरी बार अपना आशियाना छोड़ना पड़ रहा है। अगर पूरे के पूरे गांव उजाड़ दिए जाएंगे, तो लोग आखिर कहां जाकर बसेंगे। नई जगह पर शून्य से शुरुआत करना और नए घर बसाना कोई आसान काम नहीं है।
ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के लिए उनके अस्तित्व को खत्म करना गलत है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मुआवजे की विसंगतियों को दूर कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि प्रभावित परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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प्रभावितों का कहना है कि सरकार ने सभी को एक समान और उचित मुआवजा देने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। ग्रामीणों के अनुसार कुछ लोगों को करोड़ों रुपये का मुआवजा मिला है, जबकि उसी क्षेत्र के अन्य लोगों को महज कुछ लाख रुपये थमाकर संतोष करने को कहा जा रहा है।
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स्थानीय निवासी इशान शर्मा ने सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पूछा कि जितनी रकम उन्हें मिल रही है, क्या उतने में आज के दौर में जमीन खरीदना और नया मकान बनाना संभव है। उधर, सनौरा पंचायत की निवर्तमान प्रधान सुनीता देवी ने कहा कि विस्तारीकरण और बेघर होने के सदमे से कई लोगों की अब तक मौत हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि सनौरा गांव के कई परिवार ऐसे हैं जो पहले भी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हो चुके हैं और अब उन्हें तीसरी बार अपना आशियाना छोड़ना पड़ रहा है। अगर पूरे के पूरे गांव उजाड़ दिए जाएंगे, तो लोग आखिर कहां जाकर बसेंगे। नई जगह पर शून्य से शुरुआत करना और नए घर बसाना कोई आसान काम नहीं है।
ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के लिए उनके अस्तित्व को खत्म करना गलत है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि मुआवजे की विसंगतियों को दूर कर उचित कार्रवाई की जाए, ताकि प्रभावित परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
