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बौखलाहट में भाषा की मर्यादा लांघ रहे भाजपा नेता : केवल
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धर्मशाला। शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया ने प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे जनहित और विकास कार्यों से विपक्ष पूरी तरह बौखला चुका है। इसी बौखलाहट में भाजपा नेता भाषा की मर्यादा लांघकर मुख्यमंत्री के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कर रहे हैं।
धर्मशाला में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपने शब्दों पर संयम रखना चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री किसी एक व्यक्ति के नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के मुखिया हैं। राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी तय करने का माध्यम है।
केवल पठानिया ने कहा कि विचारधाराओं में मतभेद और राजनीतिक विरोध हो सकता है, लेकिन यह व्यक्तिगत कटुता और अपमान में नहीं बदलना चाहिए। आज की राजनीति को आने वाली पीढ़ियां भी देखेंगी, इसलिए नेताओं को अपने बयानों के स्तर का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत छींटाकशी छोड़कर विकास के मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी।
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उपमुख्य सचेतक ने कहा कि कांगड़ा की जनता मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी बनाने का विजन दिया है। कांग्रेस कार्यकाल में कांगड़ा को नौ नए कार्यालय मिले हैं, जबकि भाजपा के शासनकाल में केवल यहां से दफ्तरों को स्थानांतरित किया गया है।
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धर्मशाला में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपने शब्दों पर संयम रखना चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री किसी एक व्यक्ति के नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के मुखिया हैं। राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी तय करने का माध्यम है।
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केवल पठानिया ने कहा कि विचारधाराओं में मतभेद और राजनीतिक विरोध हो सकता है, लेकिन यह व्यक्तिगत कटुता और अपमान में नहीं बदलना चाहिए। आज की राजनीति को आने वाली पीढ़ियां भी देखेंगी, इसलिए नेताओं को अपने बयानों के स्तर का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत छींटाकशी छोड़कर विकास के मुद्दों पर बहस करने की चुनौती दी।
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उपमुख्य सचेतक ने कहा कि कांगड़ा की जनता मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी बनाने का विजन दिया है। कांग्रेस कार्यकाल में कांगड़ा को नौ नए कार्यालय मिले हैं, जबकि भाजपा के शासनकाल में केवल यहां से दफ्तरों को स्थानांतरित किया गया है।