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Kangra News: कड़ाही का काला तेल बढ़ाएगा कारोबारियों की कमाई
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धर्मशाला। होटल, रेस्तरां, ढाबा और मिठाई कारोबारियों के लिए इस्तेमाल हो चुका खाद्य तेल अतिरिक्त आय का जरिया बनेगा। बार-बार उपयोग के बाद काले पड़ चुके तेल को नालियों में फेंकने या दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय कारोबारी इसे अधिकृत कंपनी को बेच सकेंगे। तेल की गुणवत्ता के आधार पर कंपनी 30 रुपये प्रति लीटर तक भुगतान करेगी। इससे कारोबारियों को आय होगी व पर्यावरण संरक्षण और खाद्य सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। पिछले वर्ष जिले में करीब 940 लीटर पुराना तेल एकत्र किया गया था। इस वर्ष अब तक एक हजार लीटर तेल कंपनी को सौंपा जा चुका है।
जयपुर (राजस्थान) की एक कंपनी बायो डीजल बनाने के लिए होटल, रेस्तरां, ढाबों, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों से इस्तेमाल हो चुका तेल एकत्र कर रही है। तय मात्रा होने पर कंपनी स्वयं तेल उठाएगी और गुणवत्ता के अनुसार भुगतान करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें ट्रांस फैट और अन्य हानिकारक तत्व बढ़ जाते हैं। इससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
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होटल और मिठाई कारोबारियों से अपील है कि पुराने तेल का दोबारा उपयोग न करें। निर्धारित मानकों के अनुसार इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल को अधिकृत एजेंसी को ही सौंपें ताकि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। -डॉ. सविता ठाकुर, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग
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जयपुर (राजस्थान) की एक कंपनी बायो डीजल बनाने के लिए होटल, रेस्तरां, ढाबों, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों से इस्तेमाल हो चुका तेल एकत्र कर रही है। तय मात्रा होने पर कंपनी स्वयं तेल उठाएगी और गुणवत्ता के अनुसार भुगतान करेगी।
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विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें ट्रांस फैट और अन्य हानिकारक तत्व बढ़ जाते हैं। इससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
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होटल और मिठाई कारोबारियों से अपील है कि पुराने तेल का दोबारा उपयोग न करें। निर्धारित मानकों के अनुसार इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल को अधिकृत एजेंसी को ही सौंपें ताकि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। -डॉ. सविता ठाकुर, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग