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Kangra News: जलजनित रोगों ने दी दस्तक, धर्मशाला अस्पताल में रोजाना आ रहे 12 मरीज
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धर्मशाला। जिले में मानसून की बारिश के साथ ही जलजनित बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। दूषित पेयजल और खानपान में हुई मामूली चूक से लोग पेट के संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। जुलाई महीने के दौरान जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में डायरिया से पीड़ित 83 मरीजों को भर्ती कराना पड़ा है। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला की ओपीडी में रोजाना 10 से 12 मरीज डायरिया और पेट के संक्रमण के पहुंच रहे हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में संक्रमण का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। जुलाई में अकेले इस अस्पताल में 59 मरीज डायरिया की शिकायत के बाद भर्ती किए गए। राहत की बात यह है कि समय पर इलाज मिलने से इनमें से अधिकतर मरीजों को छुट्टी दे दी गई है, लेकिन अभी भी 10 से 12 मरीज उपचाराधीन हैं।
वहीं, जिले के अन्य नागरिक अस्पतालों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी 24 मरीजों को इलाज के लिए दाखिल करना पड़ा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पेयजल स्रोतों के गंदे होने और स्वच्छता की कमी के कारण बीमारी तेजी से फैल रही है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों में ज्यादातर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और वे लोग शामिल हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है।
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चिकित्सकों के अनुसार बरसात में बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी बहुत तेजी से पनपते हैं। अस्वच्छ पेयजल, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और गंदे हाथों से भोजन करने के कारण यह संक्रमण तेजी से एक से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है।
लापरवाही पड़ सकती है भारी : डॉ. राजेश
जिला स्वास्थ्य अधिकारी कांगड़ा डॉ. राजेश सूद ने कहा कि जुलाई में जिला कांगड़ा में कुल 83 मरीज विभिन्न अस्पतालों में डायरिया के कारण भर्ती हुए हैं। इनमें से अधिकांश ठीक होकर घर लौट चुके हैं। धर्मशाला अस्पताल में भर्ती 59 मरीजों में से वर्तमान में 10 से 12 उपचाराधीन हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रख रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर, जारी की एडवाइजरी
मामलों की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने पूरे जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस के पैकेट, जीवनरक्षक दवाइयों और अन्य जरूरी संसाधनों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
बचाव के लिए रखें ये सावधानियां
- पीने के पानी को हमेशा उबालकर और ठंडा करके ही प्रयोग में लाएं।
- खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।
- खुले में बिक रहे सामान, कटे हुए फल और बासी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
- पेट दर्द, उल्टी या दस्त के लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत ओआरएस का घोल दें और नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
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क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में संक्रमण का असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। जुलाई में अकेले इस अस्पताल में 59 मरीज डायरिया की शिकायत के बाद भर्ती किए गए। राहत की बात यह है कि समय पर इलाज मिलने से इनमें से अधिकतर मरीजों को छुट्टी दे दी गई है, लेकिन अभी भी 10 से 12 मरीज उपचाराधीन हैं।
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वहीं, जिले के अन्य नागरिक अस्पतालों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी 24 मरीजों को इलाज के लिए दाखिल करना पड़ा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पेयजल स्रोतों के गंदे होने और स्वच्छता की कमी के कारण बीमारी तेजी से फैल रही है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों में ज्यादातर छोटे बच्चे, बुजुर्ग और वे लोग शामिल हैं जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है।
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चिकित्सकों के अनुसार बरसात में बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी बहुत तेजी से पनपते हैं। अस्वच्छ पेयजल, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और गंदे हाथों से भोजन करने के कारण यह संक्रमण तेजी से एक से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है।
लापरवाही पड़ सकती है भारी : डॉ. राजेश
जिला स्वास्थ्य अधिकारी कांगड़ा डॉ. राजेश सूद ने कहा कि जुलाई में जिला कांगड़ा में कुल 83 मरीज विभिन्न अस्पतालों में डायरिया के कारण भर्ती हुए हैं। इनमें से अधिकांश ठीक होकर घर लौट चुके हैं। धर्मशाला अस्पताल में भर्ती 59 मरीजों में से वर्तमान में 10 से 12 उपचाराधीन हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रख रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर, जारी की एडवाइजरी
मामलों की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। विभाग ने पूरे जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस के पैकेट, जीवनरक्षक दवाइयों और अन्य जरूरी संसाधनों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
बचाव के लिए रखें ये सावधानियां
- पीने के पानी को हमेशा उबालकर और ठंडा करके ही प्रयोग में लाएं।
- खाना खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।
- खुले में बिक रहे सामान, कटे हुए फल और बासी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
- पेट दर्द, उल्टी या दस्त के लक्षण दिखते ही मरीज को तुरंत ओआरएस का घोल दें और नजदीकी अस्पताल ले जाएं।