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Kangra News: फ्रैंचाइजी के नाम पर ठगी की सीआईडी करेगा जांच
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धर्मशाला। बुक्स स्कैनिंग प्रोजेक्ट और फ्रैंचाइजी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के मामले की जांच अब गुप्तचर विभाग (सीआईडी) करेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस की ओर से इस पर विचार किया जा रहा है। जिले में इस ठगी को लेकर तीन युवाओं ने शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें एक प्रतिष्ठित कंपनी पर 30,55,500 रुपये ठगने के आरोप लगाए थे। इस पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू की थी। शातिरों ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाकर तीन स्थानीय युवाओं से 30,55,500 रुपये ठगे थे। शिकायतकर्ताओं ने कहा था कि सितंबर 2025 में उन्होंने इंटरनेट पर एक प्रतिष्ठित कंपनी के बुक्स स्कैनिंग प्रोजेक्ट और फ्रैंचाइजी से संबंधित विज्ञापन देखे थे।
विज्ञापन देखने के बाद कंपनी के हिमाचल प्रदेश प्रभारी और बिजनेस डिवेलपमेंट मैनेजर ने उनसे व्हाट्सएप और फोन के जरिये संपर्क साधा। उसने खुद को कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताते हुए उन्हें निवेश पर भारी मुनाफे के लुभावने ऑफर दिए। मामले में तेजी लाते हुए आरोपी 21 सितंबर 2025 को स्वयं कांगड़ा पहुंचा और शिकायकर्ताओं के साथ मुलाकात की थी। इस दौरान आरोपियों ने प्रिंटेड दस्तावेजों के माध्यम से प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी साझा की और उन पर तुरंत निवेश करने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया।
आरोपियों के झांसे में आकर अमन रत्ना, अजय कुमार चौधरी निवासी बड़ी हलेड़ और अंकिता चौधरी निवासी मटौर ने कुल 30.55 लाख रुपये की राशि सौंप दी। पैसे हड़पने के बाद जब कंपनी की ओर से कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिला था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कंपनी के निदेशक, मैनेजर सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुख्ता सूत्रों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीआईडी को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही इस दिशा में फैसला लिया जाएगा।
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विज्ञापन देखने के बाद कंपनी के हिमाचल प्रदेश प्रभारी और बिजनेस डिवेलपमेंट मैनेजर ने उनसे व्हाट्सएप और फोन के जरिये संपर्क साधा। उसने खुद को कंपनी का अधिकृत प्रतिनिधि बताते हुए उन्हें निवेश पर भारी मुनाफे के लुभावने ऑफर दिए। मामले में तेजी लाते हुए आरोपी 21 सितंबर 2025 को स्वयं कांगड़ा पहुंचा और शिकायकर्ताओं के साथ मुलाकात की थी। इस दौरान आरोपियों ने प्रिंटेड दस्तावेजों के माध्यम से प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी साझा की और उन पर तुरंत निवेश करने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया।
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आरोपियों के झांसे में आकर अमन रत्ना, अजय कुमार चौधरी निवासी बड़ी हलेड़ और अंकिता चौधरी निवासी मटौर ने कुल 30.55 लाख रुपये की राशि सौंप दी। पैसे हड़पने के बाद जब कंपनी की ओर से कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ और न ही कोई संतोषजनक जवाब मिला था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कंपनी के निदेशक, मैनेजर सहित अन्य सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुख्ता सूत्रों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीआईडी को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही इस दिशा में फैसला लिया जाएगा।