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Kangra News: पति के नाम संपत्ति न होने पर भी साझा घर में रह सकेगी बहू

Tue, 04 Aug 2026 07:44 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 04 Aug 2026 07:44 AM IST
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Daughter-in-law will be able to reside in the shared household even if the property is not in her husband's name.
धर्मशाला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पालमपुर की अदालत ने घरेलू हिंसा अधिनियम-2005 के तहत दायर एक मामले में बहू के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। पति के नाम संपत्ति या मालिकाना हक न होने पर भी अदालत ने बहू को ससुराल के साझा घर (शेयर्ड हाउसहोल्ड) में रहने का वैधानिक अधिकार दे दिया है। साथ ही सास-ससुर को निर्देश दिए हैं कि वे उसे घर से बेदखल न करें और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
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मामले के अनुसार पालमपुर तहसील के अंतर्गत क्षेत्र की एक महिला ने अपने सास-ससुर के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 की धारा 12, 18 और 19 के तहत याचिका दायर की थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि सास-ससुर ने उसे घरेलू हिंसा का शिकार बनाया और साझा घर में रहने के अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया।
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दूसरी ओर प्रतिवादियों ने आरोपों को खारिज करते हुए जमीन बेचने का दबाव बनाने और संपत्ति विवाद की बात कही थी। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पालमपुर गौरव कुमार की अदालत ने पाया कि महिला विवाह के बाद ससुराल के घर में रह चुकी है, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों के तहत वह मकान साझा घर (शेयर्ड हाउसहोल्ड) की श्रेणी में आता है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि पति का संपत्ति में स्वामित्व न होने के आधार पर बहू का यह कानूनी अधिकार समाप्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने धारा 18 के तहत संरक्षण आदेश जारी करते हुए और धारा 19 के तहत सास-ससुर को बहू को घर से बेदखल करने, उसके कब्जे में बाधा डालने या संपत्ति का हस्तांतरण करने से रोक दिया है।

उन्होंने सास-ससुर को निर्देश दिया है कि वे बहू को घर से बेदखल न करें और उसे बिजली, पानी, शौचालय जैसी सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित दीवानी मुकदमे का अंतिम निर्णय होने तक बहू का साझा घर में रहने का अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा।
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