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धर्मशाला: दलाई लामा के उत्तराधिकारी पर चीन का कोई अधिकार नहीं, चेक सीनेट ने सर्वसम्मति से पारित किया प्रस्ताव

अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 27 Mar 2026 05:00 AM IST
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सार

चीन को 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में किसी भी प्रकार का अधिकार नहीं है। यह प्रस्ताव 40 मतों से सर्वसम्मति से पारित हुआ और किसी भी सदस्य ने इसका विरोध नहीं किया।

Dharamsala: China Has No Right Over Dalai Lama's Successor; Czech Senate Unanimously Passes Resolution
14वें दलाई लामा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

तिब्बती आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चेक सीनेट ने 25 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चीन को 14वें दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन में किसी भी प्रकार का अधिकार नहीं है। यह प्रस्ताव 40 मतों से सर्वसम्मति से पारित हुआ और किसी भी सदस्य ने इसका विरोध नहीं किया। सीनेट ने स्पष्ट किया कि 15वें दलाई लामा के चयन का अधिकार केवल तिब्बती लोगों और उनकी पारंपरिक संस्था गदेन फोडरंग के पास है।

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सीनेट ने दोहराया कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी चुनना तिब्बती समुदाय का आंतरिक और धार्मिक विषय है, जिसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप विशेषकर चीन की भूमिका को पूरी तरह अस्वीकार्य माना गया है। प्रस्ताव में 12 मार्च 2026 को चीन द्वारा पारित जातीय एकता कानून की कड़ी आलोचना की गई। सीनेट के अनुसार, यह कानून तिब्बती संस्कृति, भाषा और धार्मिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास है। साथ ही यह भी कहा गया कि सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की रक्षा करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आवश्यक है और सभी देशों को इसका सम्मान करना चाहिए।

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यह प्रस्ताव सीनेट की उपाध्यक्ष जित्का साइटलोवा द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसे प्रेमिस्ल राबास, ब्रेतिस्लाव रिखलिक और जिरी रूजिच्का सहित कई सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ। बैठक की अध्यक्षता सीनेट के उपाध्यक्ष जिरी ओबरफाल्जर ने की। बैठक के दौरान चेक गणराज्य के राष्ट्रपति पेत्र पावेल और दलाई लामा के बीच जुलाई 2025 में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया गया। दलाई लामा की प्रतिनिधि थिनले चुक्की ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय विश्व को स्पष्ट संदेश देता है कि किसी भी सरकार को आध्यात्मिक परंपराओं पर नियंत्रण का अधिकार नहीं है। उन्होंने इसे तिब्बती लोगों के लिए आशा की किरण बताया।

तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज, प्रतीक और राष्ट्रगान के उपयोग से संबंधित नियम एवं विनियम के मसौदा विधेयक पारित
तिब्बती निर्वासित संसद के 17वें कार्यकाल के ग्यारहवें सत्र के दौरान गुरुवार को राष्ट्रीय ध्वज, प्रतीक और राष्ट्रगान के उपयोग से संबंधित नियम एवं विनियम के मसौदा विधेयक पर विस्तृत चर्चा के बाद इसे पारित किया गया। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष खेनपो सोनम तेनफेल ने की। विधेयक में पेश किए गए कई संशोधनों को भी सदन ने स्वीकार किया। ये संशोधन निर्वासित सरकार के प्रधानंत्री पेंपा सेरिंग ने प्रस्तुत किए थे, जिन्हें सुरक्षा विभाग की कालोन ग्यारी दोलमा का समर्थन प्राप्त था। इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 4 में तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास से जुड़े संशोधन, जिन्हें सांसद गेशे आतोंग रिनचेन ग्यात्सेन ने प्रस्तुत किया और गेशे ल्हाराम्पा गोवो लोबसांग फेंडे ने समर्थन दिया, उसे भी मंजूरी दी गई। राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के मानकों से संबंधित अनुच्छेद 7 में संशोधन को भी सदन ने स्वीकृति प्रदान की। 
 
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