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Kangra News: विस्थापितों को 50 साल बाद मिला जमीन का मालिकाना हक
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धर्मशाला। कांगड़ा जिले के 131 पौंग बांध विस्थापित परिवारों का करीब 50 साल का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। सरकार ने झकलेड़, खैरियां, छप्पर, भटोली फकोरियां और भंगोली के पात्र परिवारों को चरणबद्ध तरीके से भूमि के पट्टे सौंप दिए हैं।
इसके साथ ही इन परिवारों के लिए हिमाचली बोनाफाइड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व दस्तावेज बनवाने का रास्ता साफ हो गया है। पहले चरण में हरिपुर क्षेत्र के 89 और दूसरे चरण में भटोली फकोरियां के 42 परिवारों को मालिकाना हक दिया गया।
लंबे समय से भूमि पर कब्जा होने के बावजूद स्वामित्व नहीं मिलने से परिवारों को बैंक ऋण, कृषि सब्सिडी, मकान निर्माण, राजस्व रिकॉर्ड और कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतें आती थीं। सरकार ने प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का मकान बनाने के लिए तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का भी फैसला किया है।
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उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित मामलों का निपटारा किया जा रहा है। भूमि का मालिकाना हक मिलने के बाद अब विस्थापित परिवार आसानी से बैंक ऋण, कृषि संबंधी योजनाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। इससे उनके स्थायी पुनर्वास के साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को भी मजबूती मिलेगी। ब्यूरो
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इसके साथ ही इन परिवारों के लिए हिमाचली बोनाफाइड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व दस्तावेज बनवाने का रास्ता साफ हो गया है। पहले चरण में हरिपुर क्षेत्र के 89 और दूसरे चरण में भटोली फकोरियां के 42 परिवारों को मालिकाना हक दिया गया।
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लंबे समय से भूमि पर कब्जा होने के बावजूद स्वामित्व नहीं मिलने से परिवारों को बैंक ऋण, कृषि सब्सिडी, मकान निर्माण, राजस्व रिकॉर्ड और कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतें आती थीं। सरकार ने प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का मकान बनाने के लिए तीन लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का भी फैसला किया है।
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उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित मामलों का निपटारा किया जा रहा है। भूमि का मालिकाना हक मिलने के बाद अब विस्थापित परिवार आसानी से बैंक ऋण, कृषि संबंधी योजनाओं और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। इससे उनके स्थायी पुनर्वास के साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण को भी मजबूती मिलेगी। ब्यूरो