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Kangra News: सदन से फेरा मुंह, जिला परिषद की पहली बैठक में मात्र 18 सदस्य पहुंचे
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धर्मशाला। जिला परिषद कांगड़ा के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और नगर निगम के मेयर-डिप्टी मेयर के चुनाव न होने का सीधा असर शनिवार को जिला परिषद की पहली परिचय बैठक में देखने को मिला। परिषद के कुल 54 निर्वाचित सदस्यों में से अधिकांश ने इस बैठक से दूरी बना ली और केवल 18 सदस्य ही बैठक में शामिल हुए। राजनीतिक हलकों में इसे चुनाव टलने के विरोध और बहिष्कार से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि कम संख्या के बावजूद जिला परिषद सभागार में अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) कांगड़ा विनय कुमार की मौजूदगी में परिचय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य नवनिर्वाचित सदस्यों का परिचय कराने के साथ-साथ उन्हें जिला परिषद की कार्यप्रणाली, अधिकारों और वित्तीय व्यवस्थाओं की प्रारंभिक जानकारी देना था।
बैठक में जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने उपस्थित सदस्यों को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला परिषद की भूमिका और जिम्मेदारियों से अवगत करवाया। उन्होंने विशेष रूप से 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिलने वाले टाइड और अनटाइड फंड के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि टाइड फंड का उपयोग केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मदों, जैसे स्वच्छता, पेयजल, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर किया जाता है। वहीं, अनटाइड फंड का उपयोग पंचायतों की स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार विभिन्न विकास कार्यों में किया जा सकता है। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे इन वित्तीय प्रावधानों के तहत उपलब्ध बजट का प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अपने क्षेत्रों में बेहतर योजना तैयार करें।
बैठक के दौरान जिला परिषद और पंचायतों के बीच समन्वय तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य की बैठकों में सभी सदस्य सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके।
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हालांकि कम संख्या के बावजूद जिला परिषद सभागार में अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) कांगड़ा विनय कुमार की मौजूदगी में परिचय बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य नवनिर्वाचित सदस्यों का परिचय कराने के साथ-साथ उन्हें जिला परिषद की कार्यप्रणाली, अधिकारों और वित्तीय व्यवस्थाओं की प्रारंभिक जानकारी देना था।
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बैठक में जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने उपस्थित सदस्यों को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला परिषद की भूमिका और जिम्मेदारियों से अवगत करवाया। उन्होंने विशेष रूप से 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिलने वाले टाइड और अनटाइड फंड के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि टाइड फंड का उपयोग केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मदों, जैसे स्वच्छता, पेयजल, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास पर किया जाता है। वहीं, अनटाइड फंड का उपयोग पंचायतों की स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार विभिन्न विकास कार्यों में किया जा सकता है। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे इन वित्तीय प्रावधानों के तहत उपलब्ध बजट का प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए अपने क्षेत्रों में बेहतर योजना तैयार करें।
बैठक के दौरान जिला परिषद और पंचायतों के बीच समन्वय तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य की बैठकों में सभी सदस्य सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे, ताकि विकास कार्यों को गति मिल सके।