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हिमाचल की साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल : रोहित
Wed, 29 Jul 2026 07:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Wed, 29 Jul 2026 07:07 AM IST
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नूरपुर (कांगड़ा)। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि आजादी के समय हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर मात्र 7 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर 99.30 प्रतिशत हो गई है। यह प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। मंगलवार को चंबा रवाना होने से पूर्व नूरपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
इसी दिशा में सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम शुरू किया गया है और चरणबद्ध तरीके से सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले चरण में राज्य के 150 सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है, जिनके लिए 3,500 से 4,000 शिक्षकों का अलग कैडर तैयार कर भर्ती की जाएगी। इनमें अंग्रेजी और गणित के शिक्षकों का परिणाम घोषित हो चुका है, जबकि टीजीटी, संस्कृत और कला अध्यापकों की भर्ती जल्द होगी।
उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में अब तक करीब 8,500 पद भरे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी ग्रांट व जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद करने और ओपीएस लागू होने से लोन लिमिट घटने के कारण प्रदेश वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के लिए 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिया है, जो कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत है।
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इस अवसर पर पूर्व विधायक अजय महाजन, एएसपी डीसी वर्मा, तहसीलदार राधिका सैनी, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संदेश डडवाल और नगर परिषद अध्यक्षा नीति महाजन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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इसी दिशा में सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम शुरू किया गया है और चरणबद्ध तरीके से सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले चरण में राज्य के 150 सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है, जिनके लिए 3,500 से 4,000 शिक्षकों का अलग कैडर तैयार कर भर्ती की जाएगी। इनमें अंग्रेजी और गणित के शिक्षकों का परिणाम घोषित हो चुका है, जबकि टीजीटी, संस्कृत और कला अध्यापकों की भर्ती जल्द होगी।
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उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में अब तक करीब 8,500 पद भरे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आरडीजी ग्रांट व जीएसटी क्षतिपूर्ति बंद करने और ओपीएस लागू होने से लोन लिमिट घटने के कारण प्रदेश वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के लिए 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिया है, जो कुल बजट का लगभग 18 प्रतिशत है।
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इस अवसर पर पूर्व विधायक अजय महाजन, एएसपी डीसी वर्मा, तहसीलदार राधिका सैनी, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संदेश डडवाल और नगर परिषद अध्यक्षा नीति महाजन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।