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Kangra News: हिमकारा से जेलों में कैदियों का जीवन सुधारा
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धर्मशाला। प्रदेश सरकार की ओर से शुरू की गई हिमकारा योजना राज्य की जेलों में सुधार, कौशल विकास और सम्मानजनक पुनर्वास की दिशा में एक प्रभावी पहल बनकर उभरी है। इस योजना के तहत तैयार किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद ने आम जनता का विश्वास जीत लिया है।
हिमकारा के अंतर्गत कैदियों को जेल परिसर के भीतर ही विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाते हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को ‘हिमकारा’ ब्रांड के तहत बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे कैदियों में कार्य अनुशासन विकसित हो रहा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
इस योजना के तहत राज्य की विभिन्न जेलों में कैदियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इनमें बेकरी एवं कन्फेक्शनरी, सैलून, फास्ट फूड, कार वॉश, फूलों की नर्सरी, पशुपालन व दुग्ध उत्पादन, कारपेंट्री, वेल्डिंग और अन्य तकनीकी कार्य शामिल हैं। कैदियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदेश में हिमकारा स्टोर्स स्थापित किए गए हैं। इन स्टोर्स के माध्यम से जेलों में बने उत्पाद आम लोगों तक पहुंच रहे हैं।
धर्मशाला स्थित लाला लाजपत राय के नाम से स्थापित जेल में भी सजायाफ्ता कैदी इस योजना के तहत विभिन्न कौशल सीखकर कार्य कर रहे हैं। जेल बेकरी में कार्यरत सोम बहादुर, सब्जी एवं फल विक्रय में लगे बलविंद्र कुमार, कार वॉश में कार्यरत सचिन राणा, डेयरी से जुड़े अश्वनी कुमार, कारपेंट्री में कार्य कर रहे लक्की राज और नर्सरी और पॉलीहाउस में कार्यरत सुशील कुमार व विनय कुमार का कहना है कि सजा के दौरान मिला यह प्रशिक्षण उनके भविष्य के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
उधर, जेल अधीक्षक विकास भटनागर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इसे प्रदेश-व्यापी अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। हिमकारा केवल एक योजना नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव की सोच है, जो कैदियों को नई दिशा देने का कार्य कर रही है।
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हिमकारा के अंतर्गत कैदियों को जेल परिसर के भीतर ही विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाते हैं। उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को ‘हिमकारा’ ब्रांड के तहत बाजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे कैदियों में कार्य अनुशासन विकसित हो रहा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
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इस योजना के तहत राज्य की विभिन्न जेलों में कैदियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इनमें बेकरी एवं कन्फेक्शनरी, सैलून, फास्ट फूड, कार वॉश, फूलों की नर्सरी, पशुपालन व दुग्ध उत्पादन, कारपेंट्री, वेल्डिंग और अन्य तकनीकी कार्य शामिल हैं। कैदियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए प्रदेश में हिमकारा स्टोर्स स्थापित किए गए हैं। इन स्टोर्स के माध्यम से जेलों में बने उत्पाद आम लोगों तक पहुंच रहे हैं।
धर्मशाला स्थित लाला लाजपत राय के नाम से स्थापित जेल में भी सजायाफ्ता कैदी इस योजना के तहत विभिन्न कौशल सीखकर कार्य कर रहे हैं। जेल बेकरी में कार्यरत सोम बहादुर, सब्जी एवं फल विक्रय में लगे बलविंद्र कुमार, कार वॉश में कार्यरत सचिन राणा, डेयरी से जुड़े अश्वनी कुमार, कारपेंट्री में कार्य कर रहे लक्की राज और नर्सरी और पॉलीहाउस में कार्यरत सुशील कुमार व विनय कुमार का कहना है कि सजा के दौरान मिला यह प्रशिक्षण उनके भविष्य के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
उधर, जेल अधीक्षक विकास भटनागर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा इसे प्रदेश-व्यापी अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। हिमकारा केवल एक योजना नहीं, बल्कि सकारात्मक बदलाव की सोच है, जो कैदियों को नई दिशा देने का कार्य कर रही है।